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नरेंद्र मोदी आज केवल भारत के प्रधानमंत्री नहीं, बल्कि वैश्विक परिदृश्य के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं। उनका व्यक्तित्व और कृतित्व भारतीय लोकतंत्र की गौरवगाथा को नई ऊँचाइयों तक ले गया है। साधारण परिवार में जन्मा एक बालक, जिसने जीवन के संघर्षों को तपस्या की तरह जिया, आज विश्व राजनीति ही नहीं, सम्पूर्ण मानवता का मार्गदर्शक बन गया है। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि यदि व्यक्ति में अटूट परिश्रम, कर्मनिष्ठा और राष्ट्रनिष्ठा का अदम्य संकल्प हो, तो वह इतिहास की धारा को भी मोड़ सकता है।
नरेंद्र मोदी का उदय किसी एक व्यक्ति की उपलब्धि भर नहीं है, बल्कि यह भारत की जाग्रत चेतना और आत्मविश्वास का प्रतीक है। इक्कीसवीं सदी के भाल पर अपने कर्त्तृत्व की जो अमिट रेखाएं उन्होंने खींची हैं, वे विश्व राजनीति, मानवता एवं राष्ट्रीयता के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित रहेगी। राजनीति-क्रांति के साथ-साथ वे व्यक्ति-क्रांति एवं समाज-क्रांति के सूत्रधार है। उनके विराट व्यक्तित्व को किसी उपमा से उपमित करना उनके व्यक्तित्व को ससीम बनाता है। उनके लिये तो इतना ही कहा जा सकता है कि वे अनिर्वचनीय हैं। इस वर्ष उनका 75वां जन्मोत्सव मनाते हुए समूचा राष्ट्र अपूर्व गर्व और गौरव की अनुभूति कर रहा है। मोदी का व्यक्तित्व अनेक विलक्षणताओं का समवाय है, वह कठोर परिश्रम और मिशनरी दृष्टिकोण का जीवंत उदाहरण है। उनके दिन और रात का प्रत्येक क्षण राष्ट्र के लिए समर्पित रहता है। वे चौबीस घंटे भारत के लिए जीते हैं और योजनाओं को केवल कागजों पर नहीं छोड़ते, बल्कि उन्हें धरातल पर उतारते हैं। उनका मंत्र “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” केवल राजनीतिक नारा नहीं, बल्कि भारत के सामाजिक-सांस्कृतिक जीवन को नई दिशा देने वाला दर्शन है। उन्होंने राजनीति को सत्ता की होड़ से निकालकर सेवा और राष्ट्रनिर्माण का साधन बना दिया। काल के अनंत प्रवाह में 75 वर्षों का मूल्य बहुत नगण्य होता है, पर मोदी ने उद्देश्यपूर्ण जीवन जीकर जो ऊंचाइयां और उपलब्धियां हासिल की हैं, वे किसी कल्पना की उड़ान से भी अधिक है। अपने जीवन के सार्थक प्रयत्नों से उन्होंने इस बात को सिद्ध किया है कि साधारण पुरुष वातावरण से बनते हैं, किन्तु महामानव वातावरण बनाते हैं। समय और परिस्थितियां उनका निर्माण नहीं करती, वे स्वयं समय और परिस्थितियों का निर्माण करते हैं। साधारण पुरुष जहां अवसर को खोजते रहते हैं, वहां महापुरुष नगण्य अवसरों को भी अपने कर्तृत्व की छेनी से तराश कर महान् बना देते हैं।
नरेन्द्र मोदी का जन्म एवं पालन-पोषण वडनगर, बॉम्बे राज्य (वर्तमान गुजरात) में 17 सितंबर 1950 को हुआ। जहाँ उन्होंने अपनी माध्यमिक शिक्षा पूरी की। आठ साल की उम्र में उनका आरएसएस से परिचय हुआ और वे 1971 में गुजरात में संगठन के पूर्णकालिक कार्यकर्ता बन गए। और 1998 में महासचिव बने। वे भारतीय राजनीति के जुझारू, कर्मठ एवं जीवट वाले नेता हैं जो 2014 से भारत के प्रधानमंत्री के रूप में कार्यरत हैं। मोदी 2001 से 2014 तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहे और वाराणसी से सांसद हैं। इस वर्ष अपने 75वें जन्मदिन पर मोदी मध्य प्रदेश के धार जिले के भैंसोला गांव में रहेंगे। इस दिन प्रधानमंत्री मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल रीजन एंड एपेरल पार्क का भूमि पूजन करेंगे। कपास आधारित उद्योगों पर आधारित यह पार्क 6 लाख किसानों को फायदा देगा। इसके अलावा स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान का शुभारंभ करेंगे, इस अभियान का उद्देश्य महिलाओं और बच्चों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत कर उनकी पहुंच को बेहतर करना, गुणवत्तापूर्वक देखभाल और जागरूकता सुनिश्चित करना है। इसके अलावा महिलाओं के लिए कई अन्य योजनाओं की भी शुरुआत होगी।
मोदी के नेतृत्व में भारत ने जिन उपलब्धियों को हासिल किया है, वे युगांतरकारी कही जा सकती हैं। आर्थिक क्षेत्र में जीएसटी, डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया, मेक इन इंडिया जैसी योजनाओं ने देश को नई गति दी। सामाजिक क्षेत्र में स्वच्छ भारत अभियान, उज्ज्वला योजना, जन धन योजना, आयुष्मान भारत जैसी पहल ने करोड़ों गरीबों को सम्मानजनक जीवन का आधार दिया। राष्ट्रीय सुरक्षा के मोर्चे पर सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक ने भारत की नई आक्रामक और निर्णायक छवि प्रस्तुत की। इन सबके बीच सबसे महत्वपूर्ण यह रहा कि मोदी ने भारतीय समाज में आत्मविश्वास का संचार किया और यह भावना मजबूत की कि भारत अब किसी से पीछे नहीं रहेगा। वैश्विक मंच पर नरेंद्र मोदी ने भारत की प्रतिष्ठा को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया। संयुक्त राष्ट्र महासभा में उनके विचार, जी-20 शिखर सम्मेलन में भारत की अध्यक्षता, कोप-26 जैसे पर्यावरण मंचों पर उनकी स्पष्ट प्रतिबद्धता, विश्व को यह संदेश देती है कि भारत अब केवल दर्शक नहीं, बल्कि निर्णायक भूमिका निभाने वाला राष्ट्र है।
कोविड महामारी के दौरान वैक्सीन मैत्री योजना ने यह सिद्ध कर दिया कि भारत अपनी सीमाओं से परे जाकर पूरी मानवता के लिए सोचता है। यही कारण है कि आज भारत को विश्वगुरु की भूमिका निभाने वाला देश माना जाने लगा है और नरेंद्र मोदी इस नई पहचान के प्रेरक बने हैं। मेरे लिए भी नरेंद्र मोदी का व्यक्तित्व केवल दूर से देखने का विषय नहीं रहा, बल्कि उनके साथ जुड़े अनेक आत्मीय अनुभव आज भी मेरे जीवन की स्मृतियों में ताज़ा है। वर्ष 2007 में जब मैं सुखी परिवार फाउंडेशन के महामंत्री के रूप में कार्य कर रहा था, तब गुजरात के आदिवासी अंचल कवांट में एक विशाल आदिवासी सम्मेलन गणि राजेन्द्र विजयजी के नेतृत्व में हमने आयोजित किया था। उस सम्मेलन में नरेंद्र मोदी स्वयं पधारे थे। उस समय वे गुजरात के मुख्यमंत्री थे और कार्यक्रम में उपस्थित आदिवासी समाज की ऊर्जा और उत्साह के बीच गणि राजेन्द्र विजयजी ने बड़ी आत्मीयता से उनको कहा था-“अब आप दिल्ली चलो।” गणिजी का यह वाक्य केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक दूरदर्शी धर्मगुरु की अंतरदृष्टि थी, जो बाद में सार्थक भी हुई। गणि राजेंद्र विजयजी के प्रभाव से उस सम्मेलन में करीब डेढ़ लाख आदिवासी एकत्र हुए थे और मोदीजी ने उस सम्मेलन को जिस संवेदनशीलता और गंभीरता से संबोधित किया, वह उनकी लोकमंगलकारी दृष्टि और आदिवासी समाज के प्रति गहरी प्रतिबद्धता का प्रमाण था। मेरे लिए यह केवल एक व्यक्तिगत संस्मरण नहीं, बल्कि इस बात का साक्षात अनुभव है कि मोदीजी किस तरह जीवन के हर स्तर पर मिलने वाले लोगों और परिस्थितियों को दूरगामी दृष्टि से देखते हैं और उनमें राष्ट्र निर्माण की संभावनाएँ खोजते हैं।
मोदीजी के व्यक्तित्व का एक बड़ा पक्ष मानवीय संवेदनाओं से भरा हुआ है। चाहे गरीबों को पक्का मकान उपलब्ध कराना हो, किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में ठोस कदम उठाना हो, बेटियों की शिक्षा और सुरक्षा को सुनिश्चित करना हो या स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएँ आम जन तक पहुँचाना हो, मोदी का हर कदम जीवन को सरल और सम्मानजनक बनाने पर केंद्रित है। वे न्यूनतम सरकार और अधिकतम शासन के सिद्धांत पर चलते हुए प्रशासन को अधिक सक्षम और प्रभावी बनाते हैं। उनका नेतृत्व केवल आधुनिकता और विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति और अध्यात्म से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। उनके प्रयासों से योग को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली और 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाने का निर्णय हुआ। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण, काशी विश्वनाथ धाम और केदारनाथ धाम का पुनरुद्धार उनके सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और आस्था के प्रति गहरे सम्मान को प्रकट करता है। इस प्रकार वे आधुनिक भारत और प्राचीन भारत की आत्मा के बीच एक सेतु का कार्य करते हैं।
आज नरेंद्र मोदी का नाम विश्व के शीर्ष नेताओं में गिना जाता है। टाइम और फोर्ब्स जैसी प्रतिष्ठित पत्रिकाएँ उन्हें दुनिया के सबसे शक्तिशाली व्यक्तियों की सूची में शामिल करती हैं। अमेरिका, रूस, फ्रांस, जापान जैसे देशों के शीर्ष नेतृत्व के साथ उनके व्यक्तिगत रिश्ते भारत की कूटनीति को नई ऊँचाइयों तक ले गए हैं। आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन, शांति और विकास जैसे मुद्दों पर उनकी स्पष्ट और निर्णायक आवाज़ आज पूरी दुनिया सुनती है। उनका 75वां जन्मोत्सव केवल एक व्यक्ति के जीवन का उत्सव नहीं है, बल्कि उस युगांतरकारी यात्रा का प्रतीक है जिसने भारत को नई ऊँचाइयों की ओर अग्रसर किया है। वे उस नेतृत्व के धनी हैं जिसने भारत को विश्वगुरु बनाने की दिशा में ठोस कदम बढ़ाए हैं। कठोर परिश्रम, राष्ट्रनिष्ठा और मिशनरी दृष्टि से ओतप्रोत नरेंद्र मोदी भारतीय राजनीति का ही नहीं, विश्व राजनीति का भी स्वर्णिम अध्याय है। आने वाला समय इस बात का साक्षी बनेगा कि उनका नेतृत्व न केवल एक नए भारत का निर्माण करेगा, बल्कि विश्व को भी शांति, सहयोग और विकास का नया मार्ग दिखाएगा।



