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संयुक्त राष्ट्र में भारत का सख्त संदेश: धर्म को राजनीति का हथियार बनाना बंद हो
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पार्वथनेनी हरीश ने वैश्विक मंच पर स्पष्ट शब्दों में कहा कि दुनिया को अब धार्मिक पहचान को राजनीतिक हथियार बनाने की बढ़ती प्रवृत्ति पर गंभीरता से ध्यान देना होगा। इस दौरान उन्होंने पाकिस्तान पर भी तीखा निशाना साधा।
हरीश ने कहा कि राज्य और गैर-राज्य दोनों ही इस तरह की प्रवृत्तियों में शामिल हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत का पश्चिमी पड़ोसी पाकिस्तान अपने आसपास इस्लाम के खिलाफ भय का झूठा माहौल बनाने की कोशिश करता रहा है।
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि पाकिस्तान में अहमदिया समुदाय पर हो रहे अत्याचारों को क्या कहा जाए? अफगान नागरिकों को जबरन वापस भेजने की घटनाओं को किस रूप में देखा जाए? और पवित्र रमजान के दौरान हवाई हमलों को किस श्रेणी में रखा जाएगा? उनके अनुसार, ये सवाल इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि आरोप लगाने वाला देश खुद इन मुद्दों में घिरा हुआ है।
भारत के प्रतिनिधि ने यह भी कहा कि इस्लामी सहयोग संगठन का उपयोग भारत के खिलाफ करने की कोशिश लगातार की जाती रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस संगठन ने कई बार भारत पर झूठे और आधारहीन आरोप लगाए हैं।
हरीश ने कहा कि भारत में मुस्लिम समुदाय, जिसमें जम्मू-कश्मीर के लोग भी शामिल हैं, अपने प्रतिनिधियों का चुनाव खुद करते हैं और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखते हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत में किसी भी प्रकार का इस्लाम के प्रति भय नहीं है, बल्कि यहां सभी धर्मों के लोग मिलकर शांति और सह-अस्तित्व के साथ रहते हैं। भारत ने संयुक्त राष्ट्र से अपील की कि वह अपने प्रयास ऐसे समाज के निर्माण में लगाए, जहां हर व्यक्ति को समान अधिकार, सम्मान और कानून का संरक्षण मिले, चाहे वह किसी भी धर्म से जुड़ा हो।



