आतंकवाद पर भारत का स्पष्ट संदेश: आत्मरक्षा के अधिकार पर कोई समझौता नहीं — डॉ. एस. जयशंकर
भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने शुक्रवार को आतंकवाद के मुद्दे पर भारत का कड़ा और दो टूक रुख दोहराते हुए कहा कि देश अपनी सुरक्षा के लिए आत्मरक्षा के अधिकार का पूरा इस्तेमाल करेगा और कोई भी दूसरा देश यह तय नहीं कर सकता कि भारत अपने बचाव में क्या करे या क्या न करे।
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आईआईटी मद्रास में आयोजित कार्यक्रम में विदेश मंत्री ने कहा कि भारत की सुरक्षा सर्वोपरि है और इसके लिए जो भी आवश्यक होगा, वह किया जाएगा।
विदेश नीति पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, “आपके पड़ोसी अच्छे भी हो सकते हैं और बुरे भी। पश्चिम की ओर देखें तो दुर्भाग्य से हमारे साथ भी ऐसा ही है। अगर कोई देश जानबूझकर और लगातार आतंकवाद को बढ़ावा देता है, तो हमारे पास उसके खिलाफ आत्मरक्षा का अधिकार है और हम उसका इस्तेमाल करेंगे। इसे कैसे और कब इस्तेमाल करना है, यह फैसला भारत खुद करेगा।”
डॉ. जयशंकर ने जल बंटवारे जैसे मुद्दों का जिक्र करते हुए कहा कि दशकों तक आतंकवाद फैलाने वाले देश अच्छे पड़ोसी नहीं कहे जा सकते। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “आप यह नहीं कह सकते कि हमारे साथ पानी साझा करें, लेकिन आतंकवाद भी जारी रखें। ऐसा नहीं हो सकता। अच्छे पड़ोसी होने के फायदे भी अच्छे व्यवहार से ही मिलते हैं।”
उन्होंने भारत की पड़ोसी देशों के प्रति सकारात्मक नीति को रेखांकित करते हुए कहा कि जो देश भारत के साथ अच्छे संबंध रखते हैं, वहां भारत निवेश करता है और मदद भी करता है। कोरोना काल में पड़ोसी देशों को सबसे पहले वैक्सीन सहायता देने से लेकर श्रीलंका को आर्थिक संकट के दौरान चार अरब डॉलर की मदद तक, भारत ने हमेशा जिम्मेदार पड़ोसी की भूमिका निभाई है।
डॉ. जयशंकर ने कहा कि भारत का विकास उसके सभी पड़ोसियों के लिए लाभकारी है। “अधिकतर पड़ोसी देश यह मानते हैं कि अगर भारत आगे बढ़ेगा तो वे भी उसके साथ आगे बढ़ेंगे। यही बात बांग्लादेश के लिए भी लागू होती है,”



