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वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की 8% से अधिक वृद्धि दर: RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि भारत ने वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच 8 प्रतिशत से अधिक की मजबूत आर्थिक वृद्धि दर हासिल की है। उन्होंने यह टिप्पणी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की वार्षिक बैठक में की।

मल्होत्रा ने बताया कि भारत एक घरेलू मांग आधारित अर्थव्यवस्था है और अमेरिकी टैरिफ विवाद का इसकी वृद्धि पर सीमित प्रभाव पड़ेगा।
महंगाई में बड़ी गिरावट
RBI गवर्नर ने बताया कि भारत ने मुद्रास्फीति को 8 प्रतिशत से घटाकर 1.5 प्रतिशत तक लाने में सफलता पाई है — जो पिछले आठ वर्षों में सबसे निचला स्तर है। उन्होंने कहा कि तेल की कीमतों में कमी ने भी इस गिरावट में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
राजकोषीय घाटा नियंत्रण में
मल्होत्रा के अनुसार, भारत का राजकोषीय घाटा नियंत्रण में है और केंद्र सरकार का घाटा जीडीपी का 4.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारत का कुल कर्ज वैश्विक स्तर पर सबसे कम में से एक है।
उन्होंने सरकार और वित्तीय नीति निर्माताओं के बीच बेहतर समन्वय को इस उपलब्धि का प्रमुख कारण बताया।
रुपये की स्थिरता और वैश्विक स्थिति
मल्होत्रा ने बताया कि जहां अमेरिकी डॉलर में 10 प्रतिशत की गिरावट आई, वहीं भारतीय रुपये पर इसका सीमित असर हुआ। उन्होंने कहा कि इसका कारण टैरिफ और पूंजी प्रवाह में स्थिरता है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि रुपये की व्यवस्थित गतिशीलता भारत की मुख्य प्राथमिकता है।
भारत की आर्थिक मजबूती पर विश्वास
RBI गवर्नर ने कहा कि कोविड-19 महामारी और रूस-यूक्रेन युद्ध जैसी वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत ने अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत स्थिति में बनाए रखा है।
उन्होंने कहा, भारत की आर्थिक बुनियाद मजबूत है, पूंजी बाजार गहरे और स्थिर हैं, और यही कारण है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत उभरती अर्थव्यवस्थाओं में अग्रणी बना हुआ है।



