नरेंद्र मोदी ने अपने वीडियो संदेश और विस्तृत लेख के जरिए स्पष्ट किया है कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए मातृशक्ति की पूरी भागीदारी बेहद जरूरी है। उन्होंने विधायिका में महिलाओं के लिए आरक्षण को समय की मांग बताते हुए कहा कि इससे देश का लोकतंत्र और अधिक मजबूत, जीवंत और सहभागी बनेगा।
प्रधानमंत्री ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पहल भारत को समानता, समावेशन और जनभागीदारी के नए स्तर पर ले जाएगी। उनके अनुसार, 21वीं सदी में भारत एक ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है और अब लोकतंत्र को और अधिक प्रतिनिधिक बनाने का समय आ गया है।
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प्रधानमंत्री ने कहा कि महिलाएं देश की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करती हैं और विज्ञान, तकनीक, उद्यमिता, खेल, सशस्त्र बलों और कला जैसे हर क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बना रही हैं। उन्होंने यह भी बताया कि सितंबर 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून एक ऐतिहासिक कदम है, जिसे अब लागू करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए ताकि आने वाले चुनावों में इसका लाभ मिल सके।
उन्होंने कहा कि संसद की जिम्मेदारी है कि वह ऐसा कदम उठाए जिससे लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़े और उन्हें उनका उचित स्थान मिल सके। महिलाओं की बढ़ती भागीदारी न केवल चर्चा को समृद्ध बनाएगी, बल्कि शासन की गुणवत्ता को भी बेहतर करेगी।
वहीं अपने एक लेख में प्रधानमंत्री ने संक्रांति ,बैसाखी, सहित विभिन्न त्योहारों का जिक्र करते हुए इसे आशा और सकारात्मकता का समय बताया।
साथ ही उन्होंने महात्मा ज्योतिराव फुले की 200वीं जयंती और डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती का उल्लेख करते हुए सामाजिक न्याय और समानता के मूल्यों को याद किया।
अंत में, प्रधानमंत्री ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे इस पहल का समर्थन करें, क्योंकि यह किसी एक सरकार या दल का नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य से जुड़ा विषय है।



