नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संसद मार्च के दौरान हुए कथित हंगामे और पुलिस पर हमले के मामले में दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों द्वारा पुलिस कर्मियों पर हमला और उपद्रव करने का कथित वीडियो सामने आने के बाद कई एफआईआर दर्ज की गई हैं।
दिल्ली पुलिस ने सोमवार को हुए संसद मार्च और प्रदर्शन के दौरान कथित उपद्रव को लेकर अलग-अलग पुलिस थानों में कुल 10 एफआईआर दर्ज की हैं। अधिकारियों के अनुसार, इनमें से चार एफआईआर पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में, तीन कनॉट प्लेस पुलिस स्टेशन में और एक-एक एफआईआर मंदिर मार्ग, बाराखंभा रोड तथा कर्तव्य पथ पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई है।
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पुलिस अधिकारियों के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान आरएएफ कर्मियों के साथ कथित तौर पर मारपीट और उनका पीछा किए जाने से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए। इसके बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अलग-अलग धाराओं में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
हालांकि, प्रदर्शनकारी संगठन ने पुलिस के आरोपों को लेकर अलग रुख अपनाया है। सीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने दावा किया कि आंदोलन शांतिपूर्ण था और कथित हिंसा उस समय शुरू हुई जब पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग किया।
‘सरकार नहीं मानी तो दिल्ली आएंगे लाखों लोग’
आशुतोष रांका ने कहा कि यह आजादी के बाद के इतिहास के सबसे बड़े आंदोलनों में से एक है। उन्होंने दावा किया कि 20 तारीख को हुआ प्रदर्शन केवल एक शुरुआत थी और यदि सरकार ने प्रदर्शनकारियों की मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो आने वाले दिनों में बड़ी संख्या में लोग दिल्ली पहुंच सकते हैं।
। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आंदोलन को बदनाम करने के लिए प्रदर्शनकारियों को अराजक बताने की कोशिश की जा रही है।
पथराव और आंसू गैस के आरोपों के बीच फिर जंतर-मंतर पहुंचे प्रदर्शनकारी
सोमवार को हुए कथित पथराव, लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल के बाद भी प्रदर्शनकारियों का आंदोलन जारी रहा। अगले दिन प्रदर्शनकारी फिर जंतर-मंतर पहुंचे और वहां रातोंरात मंच तैयार कर आंदोलन को दोबारा तेज करने का प्रयास किया।
अब इस पूरे मामले को लेकर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों के दावों के बीच राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। एक तरफ पुलिस प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बिगाड़ने और सुरक्षा बलों पर हमले के आरोपों की जांच कर रही है, वहीं प्रदर्शनकारी पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं।
अब सवाल आपसे…
आपके मुताबिक दिल्ली में हुए इस प्रदर्शन के दौरान असल में क्या हुआ? क्या पुलिस की कार्रवाई उचित थी या प्रदर्शनकारियों को कानून-व्यवस्था बनाए रखते हुए अपनी मांगें उठानी चाहिए थीं?
क्या ऐसे आंदोलनों का समाधान बातचीत और लोकतांत्रिक चर्चा से निकलना चाहिए? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।



