CBI Raid News: केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने कथित 1,109 करोड़ रुपये के बैंक ऋण घोटाले की जांच के सिलसिले में गुप्ता पावर इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड से जुड़े कई ठिकानों पर बड़ी कार्रवाई की है। सीबीआई ने ओडिशा, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और झारखंड में कंपनी से जुड़े परिसरों की तलाशी ली है।
यह कार्रवाई भुवनेश्वर की विशेष सीबीआई अदालत से प्राप्त तलाशी वारंट के आधार पर की गई। छापेमारी के दौरान जांच एजेंसी ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और अन्य रिकॉर्ड जब्त किए हैं। सीबीआई के मुताबिक, जब्त सामग्री की जांच के आधार पर मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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4 राज्यों में कंपनी के ठिकानों पर छापेमारी
सीबीआई अधिकारियों के मुताबिक, कंपनी से जुड़े कई परिसरों की तलाशी ली गई। इनमें भुवनेश्वर में कंपनी के चार निदेशकों के आवास, कोलकाता स्थित पंजीकृत कार्यालय, उत्तराखंड के काशीपुर, तमिलनाडु के तिरुवल्लूर और भुवनेश्वर स्थित उत्पादन इकाइयां शामिल हैं।
जांच एजेंसी अब बरामद दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की पड़ताल कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है।

लोन लेने के लिए वित्तीय आंकड़ों में हेरफेर का आरोप
सीबीआई के अनुसार, गुप्ता पावर इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड पर बैंकों से ऋण प्राप्त करने के लिए कथित तौर पर वित्तीय आंकड़ों और स्टॉक की वैल्यू को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने का आरोप है।
जांच एजेंसी का आरोप है कि कथित रूप से गलत वित्तीय जानकारी के आधार पर कंपनी ने अपनी ऋण सीमा बढ़वाई। इसके बाद ऋण की राशि का कथित तौर पर अन्य खातों और अलग-अलग उद्देश्यों में इस्तेमाल या ट्रांसफर किया गया।
सीबीआई के अनुसार, इस कथित वित्तीय अनियमितता से बैंकों को भारी नुकसान हुआ है।
कंपनी पर करीब ₹2,900 करोड़ के कर्ज का दावा
जांच के दौरान सामने आई जानकारी के मुताबिक, गुप्ता पावर इंफ्रास्ट्रक्चर ने विभिन्न बैंकों के कंसोर्टियम से करीब 2,900 करोड़ रुपये का ऋण लिया था।
कंपनी पर पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के करीब 270 करोड़ रुपये और बैंक ऑफ इंडिया (BOI) के करीब 226 करोड़ रुपये के बकाये का भी आरोप है।
दोनों बैंकों ने वर्ष 2025 में संबंधित ऋण खातों को कथित तौर पर फ्रॉड कैटेगरी में डाल दिया था और इसकी जानकारी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को भी दी गई थी।
NCLT में भी पहुंच चुका है मामला
गुप्ता पावर इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के खिलाफ नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में भी याचिका दायर किए जाने की जानकारी सामने आई है।
इसके अलावा, केनरा बैंक ने कंपनी की विभिन्न संपत्तियों की नीलामी को लेकर सार्वजनिक नोटिस भी जारी किया था।
कंपनी ने कथित तौर पर केनरा बैंक, यूनियन बैंक, इंडियन बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, यूको बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक और IDBI बैंक समेत कई बैंकों से ऋण लिया था।
कौन-कौन थे गारंटर?
केनरा बैंक से ऋण लिए जाने के दौरान कंपनी के प्रबंध निदेशक महेंद्र कुमार गुप्ता के अलावा अभिषेक गुप्ता, जितेंद्र मोहन गुप्ता, किरण देवी गुप्ता, विनीत मोहन गुप्ता और मनमोहन गुप्ता के गारंटर के रूप में शामिल होने की जानकारी सामने आई है।
अब सीबीआई कथित बैंक ऋण घोटाले से जुड़े पूरे वित्तीय लेन-देन, ऋण की राशि के इस्तेमाल और फंड के कथित ट्रांसफर की जांच कर रही है।
मामले में जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित वित्तीय अनियमितताओं की वास्तविक प्रकृति क्या थी और इसमें कौन-कौन लोग जिम्मेदार पाए जाते हैं।
आपकी राय क्या है?
बैंकिंग सिस्टम में बड़े लोन फ्रॉड और कथित वित्तीय घोटालों को रोकने के लिए क्या बैंकों को कंपनियों की वित्तीय जानकारी की जांच और निगरानी और सख्त करनी चाहिए?
आपके अनुसार ऐसे मामलों में बैंक अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए या केवल लोन लेने वाली कंपनी और उसके जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई पर्याप्त है? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।



