इंदौर भाजपा पर आखिर क्यों पुत गई ‘कालिख’, क्या प्रदेश से लेकर नगर तक में खाती समाज की उपेक्षा पड़ गई भारी?

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इंदौर। आज मंगलवार को लंबे इंतजार के बाद भाजपा की नगर कार्यकारिणी की घोषणा हुई। ऐसी हर सूची के बाद विरोध होता है, लेकिन भाजपा में इसका तरीका थोड़ा अलग होता है। आज इंदौर भाजपा कार्यालय पर जो कुछ भी हुआ, उसकी कल्पना किसी ने नहीं की होगी। प्रदेश से लेकर नगर तक में अपनी उपेक्षा से नाराज खाती समाज का गुस्सा उबल पड़ा और इंदौर भाजपा पर कालिख पुत गई।

उल्लेखनीय है कि जब से कार्यकारिणी बनाने की कवायद चल रही है, तब से नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा संतुलन बनाने की कोशिश में जुटे थे। उनके ऊपर भी कई वरिष्ठों और गरिष्ठों का दबाव था। कुछ एहसान थे, जिन्हें चुकाना जरूरी था तो कुछ की बात वे टाल नहीं सकते थे। नाम सैकड़ों थे, पद कम। ऐसे में फैसला करना काफी मुश्किल था। महामंत्री पद को लेकर चल रही खींचतान को उन्होंने कुछ दिग्गजों को संतुष्ट कर निपटा लिया, लेकिन उपाध्यक्ष पद को लेकर भी कम मारामारी नहीं थी।

इंदौर : बीजेपी की नई कार्यकारिणी पर बवाल, खाती समाज ने किया प्रदर्शन -  Makdai Express24

इंदौर भाजपा पर आखिर क्यों पुत गई ‘कालिख’, क्या प्रदेश से लेकर नगर तक में खाती समाज की उपेक्षा पड़ गई भारी?इंदौर भाजपा पर आखिर क्यों पुत गई ‘कालिख’, क्या प्रदेश से लेकर नगर तक में खाती समाज की उपेक्षा पड़ गई भारी?भाजपा ने जिराती का नहीं रखा ध्यान

जरा याद कीजिए जब राऊ विधानसभा बनी थी तो भाजपा ने कांग्रेस के जीतू पटवारी के सामने जीतू जिराती में अपना नेता देखा। जिराती ने पहली बार जीत कर इस सीट पर भाजपा का कब्जा जमा लिया। इसके बाद से जिराती का कद भाजपा में बढ़ गया, लेकिन जिराती को वह सीट दोबारा नहीं मिली। प्रदेश कार्यकारिणी में उपाध्यक्ष पद से ही वे संतुष्ट रहे और इंदौर का खाती समाज भी यह सोचकर चुप रहा कि चलो अपना नेता प्रदेश में तो है। जिराती ने अपने काम में कभी कोताही नहीं रखी और हर नेता उनकी तारीफ करता रहा। आखिर फिर ऐसा क्या हुआ कि जिराती को प्रदेश कार्याकारिणी में भी जगह नहीं दी गई।

नगर कार्यकारिणी में एक पद तो मिल ही सकता था

प्रदेश कार्यकारिणी घोषित होने के बाद खाती समाज ने कोई विरोध नहीं किया। समाज के लोगों ने सोचा कि अभी नगर कार्यकारिणी बननी है, इसमें कोई न कोई जगह तो मिल ही जाएगी। जब नगर कार्यकारिणी में भी जगह नहीं मिली तो समाज का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। फिर क्या था जो नहीं होना था वही हुआ। भाजपा कार्यालय पर लगे नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा के पोस्टर पर कालिख पोती गई। उनके नेम प्लेट पर भी कालिख लगी और भाजपा कार्यालय के सामने उनका पुतला भी जला। यहां सवाल यह है कि सूची फाइनल करने वाले भाजपा के दिग्गज नेताओं को इसका अंदेशा नहीं था या फिर इनमें से कुछ चाहते थे कि खाती समाज भड़के।

खाती समाज के कार्यकर्ताओं का इस्तीफा

बताया जाता है कि इस विरोध के बाद खाती समाज से जुड़े 28 से ज्यादा कार्यकर्ताओं ने इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफों का सिलसिला अभी जारी है। इस पूरे मामले में खाती समाज के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पवन चौधरी ने कहा कि भाजपा द्वारा हमारे समाज को नजरअंदाज किया जा रहा है। हमारे नेता जीतू जिराती को पार्टी व्यक्तिगत टारगेट कर रही है। हम जीतू पटवारी को नजरअंदाज कर जीतू जिराती के कहने पर भाजपा को वोट देते आए हैं, लेकिन उनके समर्थकों को ही पदाधिकारी नहीं बनाया जा रहा है। हमारा 80 प्रतिशत समाज भाजपा को ही वोट करती है।

हाड़ा के उपाध्यक्ष बनने पर भी चौंके लोग

भाजपा नगर कार्यकारिणी में उपाध्यक्ष पद पर शामिल होने के लिए कार्यकर्ताओं की लंबी लाइन थी। हर नेता अपने समर्थकों को महामंत्री न सही तो उपाध्यक्ष जरूर बनाना चाहता था, ऐसे में कुछ नाम ऐसे घोषित हुए जिस पर लोगों को आश्चर्य हो रहा है। इसमें से एक नाम डॉ.दिप्ती हाड़ा का है। भाजपा में इनका का क्या योगदान है इसका पता काफी कम लोगों को हो, लेकिन यह सबको पता है कि हाड़ा मध्यप्रदेश के सबसे विवादित मेडिकल कॉलेज इंडेक्स से जुड़ी हैं। इंडेक्स के सर्वेसर्वा सुरेश भदौरिया पर कई केस हैं और हाल ही में मेडिकल कॉलेजों की फर्जी मान्यता के मामले में भी उनका नाम उछला था। भाजपा के लोग ही आरोप लगा रहे हैं कि दिप्ती हाड़ा ने धनबल के माध्यम से यह पद हासिल किया है। विरोध और भी हैं। इनके कारणों को खुद भाजपा के वरिष्ठों को ही समझना होगा।

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