डेली कॉलेज का संविधान बदलने के मंसूबों पर कलेक्टर शिवम वर्मा का स्पीड ब्रेकर, कहा-ऐसा कोई फैसला नहीं ले सकता डीसी बोर्ड

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इंदौर। डेली कॉलेज का संविधान बदलने की तैयारी में जुटे डीसी बोर्ड के मंसूबों पर अब पानी फिर गया है। पैरेंट्स की शिकायत पर कलेक्टर शिवम वर्मा ने निर्देश जारी किया है कि 12 नवंबर को डीसी बोर्ड की बैठक तो हो सकती है, लेकिन उसमें संविधान बदलने जैसा कोई फैसला नहीं हो सकता।

उल्लेखनीय है कि डेली कॉलेज के पैरेंट्स के एक प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर शिवम वर्मा से मुलाकात कर वहां चल रही गतिविधियों की पूरी जानकारी दी थी। प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर से कहा था कि 12 नवंबर को एक बैठक बुलाई है। इसमें बोर्ड के सिर्फ 9 सदस्य ही उपस्थित रहेंगे। नियम के विपरित यह मीटिंग बुलाकर डीसी बोर्ड संविधान में संशोधन करना चाहता है जिससे कि वह हमेशा सत्ता में बना रहे। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि इससे जुड़ा केस अभी सक्षम अधिकारी के समक्ष लंबित है और यह बोर्ड अपने पावर का दुरुपयोग कर संविधान में संशोधन कर अपना हित पूरा करना चाहता। इससे संस्थान का नुकसान होगा। प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर से अनुरोध किया था कि पूरे मामले की जांच करवाएं तथा 12 नवंबर को होने वाली बैठक पर तत्काल रोक लगाएं।

कलेक्टर शिवम वर्मा ने जारी किए निर्देश

पैरेंट्स की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए कलेक्टर शिवम वर्मा ने डीसी बोर्ड को यह निर्देश जारी किए हैं कि 12 नवंबर को होनेवाली बैठक में सिर्फ प्रशासनिक एवं स्कूल के कार्यों से संबंधित ही फैसले लिए जाएं। शासन के नियमों के विपरित या संविधान बदलने जैसा कोई फैसला नहीं लिया जाए। कलेक्टर वर्मा ने कहा कि पैरैंट्स की शिकायत पर उन्होंने गौर किया है। यह भी पाया गया है कि इस मामले में शासन से एक स्टे मिला हुआ है। ऐसे में कोई व्यापक चेंज वाले प्रस्ताव पर मंजूरी नहीं हो सकती है। कलेक्टर ने बताया कि इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

बिना एजीएम बुलाए संविधान बदलने का प्रयास

पैरेंट्स ने कलेक्टर को सौंपे अपने ज्ञापन में कहा था कि डीसी बोर्ड ने एक जुलाई 25 को अपनी मीटिंग में बिना एजीएम बुलाए गलत तरीके से संविधान बदलने का प्रयास किया। प्रतिनिधिमंडल ने कहा था कि पारदर्शिता एवं जवाबदेही के मकसद से सब रजिस्ट्रार इंदौर के समक्ष हमने याचिका दायर की थी। इसमें 29 अगस्त 25 को एक आदेश पारित किया गया कि डेली कॉलेज में वार्षिक आमसभा बुलाई जाए, जिसमें सभी सदस्यों को आमंत्रित किया जाए। इस आदेश के विरुद्ध डेली कॉलेज ने रजिस्ट्रार भोपाल में अपील दायर की एवं 19 सितंबर 25 को डेली कॉलेज को स्टे मिला है, लेकिन अंतिम निर्णय आना बाकी है।

मनमाने तरीके से बढ़ा लिया कार्यकाल

प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर वर्मा को यह भी बताया था कि डीसी बोर्ड ने 29 सितंबर 25 को एक बैठक कर स्वयं का कार्यकाल चार महीने के लिए बढ़ा लिया। नियमानुसार चुनाव इसी साल दिसंबर में हो जाना चाहिए, लेकिन बोर्ड चुनाव कराना नहीं चाहता। इस तरफ मनमाने तरीके से एक 150 साल पुरानी शैक्षणिक संस्था को गलत दिशा में ले जाने की कोशिश हो रही है। बोर्ड अपनी असीमित शक्तियों का दुरुपयोग कर मनमाने निर्णय कर रहा है जो कि संस्थान एवं छात्रों के हित में नहीं है।

चुनाव ही नहीं करवाना चाहते लुल्ला

पैरेंट्स और ओल्ड डेलियन का कहना है कि डीसी बोर्ड के सदस्य धीरज लुल्ला संविधान बदलकर अब चुनाव ही नहीं कराना चाहते। लुल्ला के कार्यकाल में ही डेली कॉलेज के इतिहास में 2020 और 2025 में दो बार कार्यकाल बढ़ा। इस वर्ष जो छह माह के लिए कार्यकाल बढ़ा उसकी कोई जरूरत ही नहीं थी। इसमें लुल्ला को मोनू भाटिया जैसे कई सदस्यों का साथ मिल रहा है, जो डीसी बोर्ड पर हमेशा अपना ही कब्जा रखना चाहते हैं।

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