दिल्ली में वायु प्रदूषण की बढ़ती समस्या के बीच पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने स्पष्ट किया है कि दिल्ली के प्रदूषण में पंजाब के किसानों का कोई हाथ नहीं है। उन्होंने कहा कि पंजाब के किसान राजनीतिक कारणों से गलत तरीके से दोषी ठहराए जा रहे हैं, जबकि वास्तविकता इससे अलग है।
किसानों को दिल्ली प्रदूषण के लिए दोषी ठहराने का पंजाब सरकार का विरोध
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि पंजाब के किसानों को दिल्ली के प्रदूषण के लिए जिम्मेदार ठहराना गलत है। उन्होंने बताया कि जब दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 400 से ऊपर था, उस समय पंजाब के मालवा क्षेत्र में धान की कटाई का लगभग 20% भी काम पूरा नहीं हुआ था। इस तथ्य से यह साबित होता है कि पराली जलाने का दिल्ली के प्रदूषण में कोई योगदान नहीं था।
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पराली जलाने के मामलों में भारी गिरावट और मशीनों का योगदान
आम आदमी पार्टी के नेताओं के मुताबिक पंजाब में पराली जलाने के मामले पिछले वर्षों की तुलना में लगभग 90% से 95% कम हो गए हैं। 2024 में 10,909 मामले दर्ज हुए, वहीं 2025 में यह संख्या घटकर लगभग 5,114 हो गई। चालू सत्र में नवंबर 2026 तक केवल लगभग 1,000 मामले ही सामने आए हैं। यह गिरावट पंजाब सरकार द्वारा किसानों को 21,000 से अधिक फसल अवशेष प्रबंधन (CRM) मशीनें उपलब्ध कराने के कारण संभव हुई है।
आर्थिक प्रोत्साहन की मांग और FIR पर पंजाब सरकार की प्रतिक्रिया
भगवंत मान ने केंद्र सरकार से किसानों को पराली न जलाने के लिए प्रति एकड़ ₹3,000 की वित्तीय सहायता देने की मांग की है। उन्होंने पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ FIR दर्ज करने तथा सख्त कार्रवाई करने के विरोध में कहा कि इससे किसानों की छवि खराब होती है और यह न्यायसंगत नहीं है।

दिल्ली प्रदूषण के स्थानीय कारणों पर पंजाब सरकार का जोर
मान सरकार का तर्क है कि दिल्ली के प्रदूषण के मुख्य कारण यहां के वाहनों का धुआं, निर्माण कार्यों से निकलने वाली धूल, औद्योगिक उत्सर्जन और पड़ोसी राज्यों हरियाणा तथा उत्तर प्रदेश से आने वाला प्रदूषण है। पराली जलाना इस सूची में एकमात्र कारण नहीं है। इसलिए पंजाब के किसानों को इस समस्या का जिम्मेदार मानना अनुचित है।
आंकड़ों से पराली जलाने के मामलों में सुधार की पुष्टि
पंजाब में पराली जलाने के मामलों में कमी के स्पष्ट आंकड़े उपलब्ध हैं। पहले जहां 70,000 से 80,000 मामले दर्ज होते थे, अब यह संख्या काफी कम हो गई है। यह बदलाव पंजाब सरकार की नीतियों और किसानों के सहयोग से संभव हुआ है। इसलिए पंजाब के किसानों को दिल्ली प्रदूषण के लिए दोषी ठहराना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है।
आगे की चुनौतियां और प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में प्रयास
हालांकि पंजाब के किसानों का दिल्ली प्रदूषण में कोई हाथ नहीं है, लेकिन वायु गुणवत्ता सुधार के लिए सभी राज्यों को मिलकर काम करना होगा। पंजाब सरकार ने अपने स्तर पर किसानों के लिए पराली प्रबंधन के साधन उपलब्ध कराए हैं। साथ ही, दिल्ली और आसपास के राज्यों में वाहनों और औद्योगिक प्रदूषण पर भी नियंत्रण की सख्त जरूरत है। इससे आम जनता को बेहतर और स्वच्छ हवा मिल सकेगी।



