बेरछा रेंज में बम फटने से घायल हजारीलाल गिरवाल की इंदौर में मौत की खबर ने स्थानीय इलाके में दुख और चिंता की लहर पैदा कर दी है। यह घटना सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को दोपहर करीब 1 बजे महू के पास स्थित बेरछा रेंज के जंगलों में हुई।
बेरछा रेंज में बम फटने से हजारीलाल गिरवाल घायल हुए
बेरछा रेंज में बम फटने से हजारीलाल गिरवाल गंभीर रूप से घायल हुए थे। 55 वर्षीय हजारीलाल कैलोड कुटी गांव के निवासी थे और जंगल में सूखी लकड़ियां बीनने गए थे। अचानक जमीन में पड़ा अनफटा सैन्य बम फट गया, जिससे उनके शरीर पर छर्रों से गंभीर चोटें आईं।
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परिवार ने तुरंत चिकित्सकीय सहायता के लिए किया प्रयास
घटना के तुरंत बाद हजारीलाल ने अपने बेटे आकाश को फोन कर मदद के लिए बुलाया। स्थानीय ग्रामीणों ने उन्हें महू के मध्य भारत अस्पताल पहुंचाया जहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी हालत गंभीर देख उन्हें इंदौर के एमवाय अस्पताल रेफर कर दिया गया।
पुलिस और सेना ने शुरू की जांच
बेरछा रेंज में बम फटने से हजारीलाल गिरवाल की मौत की सूचना मिलते ही बड़गोंदा थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। थाना प्रभारी प्रकाश वास्कले ने बताया कि सेना के अधिकारियों को भी सूचित कर घटना स्थल का निरीक्षण कराया गया है।
सेना के अभ्यास क्षेत्र में विस्फोटक अवशेषों का खतरा
बेरछा रेंज सेना का अभ्यास क्षेत्र है जहां युद्धाभ्यास के दौरान बम फटाए जाते हैं। हालांकि, इस क्षेत्र को प्रतिबंधित घोषित किया गया है, बावजूद इसके ग्रामीणों के यहां लकड़ी बीनने और मवेशी चराने के लिए आने की घटनाएं सामने आती रहती हैं। ऐसे विस्फोटक अवशेष जानलेवा साबित हो सकते हैं।
बम के खाली खोल मिलने से सुरक्षा पर उठे सवाल
हजारीलाल गिरवाल की मौत के बाद उनके घर के पीछे सेना के अभ्यास में इस्तेमाल किए गए बमों के खाली खोल भी मिले हैं। बताया जा रहा है कि इन खोलों को तांबा और पीतल के लिए कबाड़ में बेचने के उद्देश्य से जमा किया जाता था। यह बात सुरक्षा व्यवस्था की कमियों को उजागर करती है।
ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम
हजारीलाल गिरवाल की मौत से यह स्पष्ट हो गया है कि बेरछा रेंज के आसपास रहने वाले ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाने जरूरी हैं। स्थानीय प्रशासन और सेना को मिलकर निगरानी बढ़ानी चाहिए ताकि विस्फोटक अवशेषों से होने वाले हादसों को रोका जा सके।



