पवन खेड़ा का आरोप है कि केंद्र सरकार अरुणाचल सीमा विवाद की खबरों को जानबूझकर दबा रही थी। कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने 23 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान यह खुलासा किया। उन्होंने कहा कि अरुणाचल प्रदेश में स्थिति गंभीर बनी हुई है और सरकार इसे छिपा रही है।
आईटीबीपी महानिदेशक के बयान पर पवन खेड़ा की प्रतिक्रिया
पवन खेड़ा ने इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर के बयान का हवाला दिया। आईटीबीपी डीजी ने खुलासा किया था कि अरुणाचल प्रदेश सीमा पर चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के साथ आमने-सामने का तनाव जारी है। इस बयान को लेकर खेड़ा ने कहा कि यह स्थिति सरकार द्वारा छिपाई जा रही थी।
सरकार पर सीमा विवाद की खबरें दबाने का आरोप
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार अरुणाचल सीमा पर भारतीय सेना और आईटीबीपी के जवानों के संघर्ष और सीमा विवाद की खबरों को लंबे समय से दबा रही थी। उन्होंने कहा कि आम जनता को इस तनाव की वास्तविक जानकारी नहीं दी जा रही है।
गश्त के मुद्दे पर गंभीर सवाल
पवन खेड़ा ने सवाल उठाया कि क्या भारतीय सेना आज भी उन सभी जगहों पर गश्त कर पा रही है जहां वे अप्रैल 2020 से पहले गश्त किया करती थी। उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि सीमा पर नियंत्रण कमजोर हो रहा है।
जून 2020 गलवान घाटी की घटना और चीन को क्लीन चिट
उन्होंने जून 2020 में लद्दाख में हुए गलवान घाटी गतिरोध का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार ने चीन को क्लीन चिट देकर उसके हौसले बढ़ाए हैं। उन्होंने कहा कि इससे भारत की सीमा सुरक्षा पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
चीन के साथ व्यापार घाटा और वीजा नीति पर सवाल
कांग्रेस ने वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा 112 अरब डॉलर तक पहुंचने का आंकड़ा पेश किया। साथ ही पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि सीमा विवाद के बीच भी सरकार चीनी अधिकारियों और कामगारों के वीजा प्रतिबंधों में ढील दे रही है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी जताई चिंता
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने आईटीबीपी डीजी के बयानों का समर्थन किया। उन्होंने प्रधानमंत्री से देश के सामने सीमा सुरक्षा और चीन नीति की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। यह मुद्दा राजनीतिक और सुरक्षा दोनों दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है।



