IIT BHU में देश का पहला स्कूल ऑफ फिजिकल AI खोलने की घोषणा की गई है। यह स्कूल फिजिकल AI और स्वायत्त प्रणालियों (Autonomous Systems) पर केंद्रित होगा, जहाँ रोबोट मशीनें और सेंसरयुक्त स्मार्ट उपकरण विकसित किए जाएंगे।
IIT BHU ने 15 जुलाई 2026 को स्कूल ऑफ फिजिकल AI की स्थापना का आदेश जारी किया
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, वाराणसी (IIT BHU) ने 15 जुलाई 2026 को आधिकारिक रूप से ‘स्कूल ऑफ फिजिकल AI एंड ऑटोनॉमस सिस्टम्स’ की स्थापना का आदेश जारी किया। यह देश का पहला ऐसा स्कूल होगा जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता को वास्तविक दुनिया की मशीनों में लागू करने पर केंद्रित होगा।
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18 जुलाई 2026 को स्कूल के संचालन के लिए समिति का गठन किया गया, जिसमें प्रो. अमित पात्रा को अध्यक्ष और प्रो. श्याम कमल को संयोजक नियुक्त किया गया।

स्कूल ऑफ फिजिकल AI का उद्देश्य और शोध क्षेत्र
इस स्कूल का मुख्य उद्देश्य AI तकनीक को डिजिटल दुनिया से निकालकर भौतिक रोबोटिक्स, स्मार्ट मशीनों और स्वायत्त प्रणालियों के रूप में विकसित करना है। इसका ध्यान कृषि, स्वास्थ्य सेवा, आपदा प्रबंधन और औद्योगिक स्वचालन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में प्रासंगिक तकनीकों के विकास पर रहेगा।
यह पहल भारत को चीन, जापान और कोरिया जैसे देशों के साथ इस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम बनाएगी।
अंतरविषयक पाठ्यक्रम में कंप्यूटर साइंस, मैकेनिकल इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स का समावेश
स्कूल ऑफ फिजिकल AI के अंतर्गत एक बहुविषयक ढांचा अपनाया जाएगा, जिसमें कंप्यूटर साइंस, मैकेनिकल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स और मटेरियल साइंस विभाग साथ मिलकर काम करेंगे। इस तरीके से विद्यार्थियों को व्यापक ज्ञान मिलेगा।
2027 से यहाँ बी.टेक स्तर का विशेष पाठ्यक्रम शुरू होगा, जो ‘करके सीखने’ (Learning by Doing) पर आधारित होगा।
पाठ्यक्रम की विशेषताएँ और प्रवेश प्रक्रिया
स्कूल में बी.टेक इन फिजिकल AI ऑटोनॉमस सिस्टम्स के लिए चार वर्षीय पाठ्यक्रम तैयार किया जा रहा है। इसमें छात्रों को न केवल सैद्धांतिक ज्ञान मिलेगा, बल्कि व्यावहारिक परियोजनाओं पर भी काम करना अनिवार्य होगा।
प्रवेश जेईई एडवांस्ड के माध्यम से होगा। प्रत्येक बैच में 30 से 60 छात्र शामिल किए जाएंगे। छठे सेमेस्टर में छात्रों को औद्योगिक क्षेत्रों में छह महीने के लिए भेजा जाएगा, जिससे वे वास्तविक दुनिया में काम करने वाले उपकरणों का निर्माण सीख सकें।
फिजिकल AI तकनीक का आम जीवन में प्रभाव
फिजिकल AI से विकसित मशीनें अपने परिवेश को समझकर स्वतः निर्णय लेने में सक्षम होंगी। इससे कृषि में स्मार्ट सेंसर, अस्पतालों में स्वायत्त लॉजिस्टिक्स, और उद्योगों में ऑटोमेशन जैसी तकनीकों को बढ़ावा मिलेगा।
इसका लाभ सीधे आम आदमी तक पहुंचेगा क्योंकि यह तकनीक उनकी जीवनशैली को अधिक स्मार्ट और सुविधाजनक बनाएगी।
आईआईटी बीएचयू की पहल से देश में तकनीकी शोध को मिलेगा नया आयाम
IIT BHU के इस नए स्कूल से भारत में भौतिक AI और ऑटोनॉमस सिस्टम्स के क्षेत्र में शोध को एक नया मंच मिलेगा। यह न केवल शिक्षा के स्तर को बढ़ाएगा, बल्कि देश की तकनीकी आत्मनिर्भरता को भी मजबूत करेगा।
आने वाले वर्षों में यह स्कूल वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत को अग्रणी बनाएगा और युवाओं को अत्याधुनिक तकनीक सीखने का अवसर प्रदान करेगा।



