प्रियंका कक्कड़ के बाद अभिनंदिता माथुर ने भी आम आदमी पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। अभिनंदिता दयाल माथुर ने 14 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ के जरिए अपनी इस घोषणा को सार्वजनिक किया। यह इस्तीफा पार्टी के लिए एक गंभीर राजनीतिक संकेत माना जा रहा है।
अभिनंदिता माथुर ने आम आदमी पार्टी से लिया अलग होने का फैसला
अभिनंदिता माथुर ने बताया कि वह पिछले कई महीनों से आम आदमी पार्टी में निष्क्रिय थीं और किसी भी आधिकारिक पद पर नहीं थीं। इसके बावजूद मीडिया के लगातार संपर्क में आने के कारण उन्होंने अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए इस्तीफा देने का निर्णय लिया। उनके इस्तीफे से पार्टी में असंतोष की खबरें और भी गहराती नजर आ रही हैं।
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प्रियंका कक्कड़ के इस्तीफे के बाद अभिनंदिता माथुर का कदम
प्रियंका कक्कड़ ने 3 अक्टूबर 2026 को आम आदमी पार्टी से इस्तीफा दिया था। कक्कड़ ने पार्टी के शुरुआती सिद्धांतों से भटकने का आरोप लगाते हुए इस्तीफा दिया। उन्होंने तुरंत ही भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर ली। इस कदम ने आम आदमी पार्टी के आंतरिक संकट को उजागर किया।
प्रियंका कक्कड़ का आम आदमी पार्टी में योगदान और वर्षों का सफर
प्रियंका कक्कड़ ने 2013 में आम आदमी पार्टी की सदस्यता ली थी। 11 साल तक उन्होंने पार्टी के लिए काम किया और राष्ट्रीय मुख्य प्रवक्ता के रूप में अपनी पहचान बनाई। उनके इस्तीफे से पार्टी की स्थिति पर सवाल उठने लगे हैं, खासकर जब पार्टी आगामी दिल्ली और पंजाब चुनावों की तैयारियों में लगी है।
अन्य नेताओं के कांग्रेस में शामिल होने से आम आदमी पार्टी को झटका
प्रियंका कक्कड़ के साथ ही पूर्व विधायक श्याम सुंदर शर्मा और पत्रकार रजत टंडन ने भी कांग्रेस में शामिल होकर आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका दिया है। इन सभी के पार्टी छोड़ने से आम आदमी पार्टी की छवि पर असर पड़ा है और पार्टी के लिए आगामी राजनीतिक मुकाबले चुनौतीपूर्ण बन गए हैं।
आम आदमी पार्टी की वर्तमान राजनीतिक परिस्थिति
दिल्ली और पंजाब में राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच दो प्रमुख महिला नेताओं का एक के बाद एक आम आदमी पार्टी छोड़ना पार्टी के लिए चिंता का विषय बन गया है। यह इस्तीफे पार्टी की अंदरूनी असंतुष्टि को दर्शाते हैं, जिससे आने वाले समय में पार्टी की रणनीति प्रभावित हो सकती है।
आगे का राजनीतिक परिदृश्य और आम आदमी पार्टी की संभावनाएं
आने वाले चुनावों को देखते हुए, आम आदमी पार्टी को अपनी कमजोरियों पर ध्यान देना होगा। अभिनंदिता माथुर और प्रियंका कक्कड़ जैसे अहम नेताओं के जाने से पार्टी को अपनी छवि सुधारने और संगठन को मजबूत करने की जरूरत है। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि अगर पार्टी ने प्रभावी कदम नहीं उठाए तो उसका चुनावी प्रदर्शन प्रभावित हो सकता है।



