मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हरदा जिले में जिला संयोजक आदिम जाति कल्याण विभाग को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई प्रशासनिक लापरवाही और कर्मचारियों के मानदेय भुगतान में देरी के कारण की गई है।
आदिम जाति कल्याण विभाग के जिला संयोजक का निलंबन
9 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हरदा जिले में आदिम जाति कल्याण विभाग के जिला संयोजक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। विभागीय कर्मचारियों के 10 महीने से अधिक समय से मानदेय भुगतान न होने की गंभीर समस्या को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। इससे विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे थे।
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निलंबन की यह कार्रवाई ‘समाधान ऑनलाइन’ कार्यक्रम की समीक्षा बैठक के दौरान की गई, जिसमें मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सीधे जनसमस्याओं पर चर्चा की।

‘समाधान ऑनलाइन’ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री का सीधा जनसंवाद
मुख्यमंत्री ने ‘समाधान ऑनलाइन’ कार्यक्रम के तहत पांच आवेदकों से सीधे बात की और उनकी शिकायतों का संज्ञान लिया। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि लोक कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
यह कदम नागरिकों की शिकायतों के त्वरित समाधान और प्रशासनिक जवाबदेही को सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मानदेय भुगतान में देरी का प्रशासनिक प्रभाव
आदिम जाति कल्याण विभाग के कर्मचारियों को मानदेय का भुगतान 10 महीनों से लंबित था। इससे न केवल कर्मचारियों में असंतोष बढ़ा बल्कि विभागीय कार्यों में भी बाधा आई। यह स्थिति विभाग की सेवाओं की गुणवत्ता पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही थी।
मुख्यमंत्री के इस कड़े रुख से यह स्पष्ट हुआ कि वे शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही को प्राथमिकता देते हैं।
हरदा जिले में प्रशासनिक सुधारों की दिशा में कदम
हरदा जिले में जिला संयोजक के निलंबन के बाद प्रशासनिक व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। इससे विभागीय कार्य सुचारू रूप से चलाने में मदद मिलेगी।
इसके अलावा, अन्य संबंधित अधिकारियों को भी अपनी जिम्मेदारी समझने और कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं।



