आरबीआई एमपीसी बैठक के परिणाम ने स्पष्ट किया कि भारत की अर्थव्यवस्था ग्लोबल चुनौतियों के बावजूद तेज़ गति से बढ़ेगी। 5 से 7 अक्टूबर 2026 को भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने अपनी 63वीं बैठक में महत्वपूर्ण फैसले लिए। इस बैठक की अध्यक्षता आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने की।
आरबीआई ने रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की वृद्धि की
बैठक में सर्वसम्मति से नीतिगत रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत करने का निर्णय लिया गया। यह फरवरी 2023 के बाद पहली बार ब्याज दर में वृद्धि है। इसके साथ ही स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी दर 5.25 प्रतिशत और मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी तथा बैंक दर 5.75 प्रतिशत कर दी गई।
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इस कदम का उद्देश्य बढ़ती महंगाई को नियंत्रित करना और आर्थिक स्थिरता बनाए रखना है। यह स्पष्ट संकेत है कि आरबीआई अब ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ रुख अपना रहा है, जो निकट भविष्य में दर कटौती की संभावना को समाप्त करता है।
जीडीपी वृद्धि दर में 40 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी
आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत कर दिया है। इससे पहले यह अनुमान 6.7 प्रतिशत था। यह वृद्धि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बावजूद देश की आर्थिक मजबूती को दर्शाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस वृद्धि में घरेलू मांग में सुधार और निर्यात क्षेत्र की मजबूती मुख्य भूमिका निभा रही है। इसके अलावा, सरकारी निवेश और उपभोक्ता खर्च में भी बढ़ोतरी देखी गई है।
महंगाई के बढ़े हुए अनुमान ने चिंता जताई
आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति का अनुमान 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.2 प्रतिशत किया है। पश्चिम एशिया संकट के गहराने और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण यह बदलाव हुआ है।
महंगाई में इस वृद्धि का असर आम जनता की जेब पर पड़ेगा, खासकर खाद्य और ऊर्जा की महंगाई से। हालांकि, आरबीआई का मानना है कि यह स्थिति नियंत्रण में रहेगी और आर्थिक वृद्धि के साथ संतुलित होगी।

मौद्रिक नीति में ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ रुख अपनाया गया
आरबीआई ने मौद्रिक नीति के रुख को न्यूट्रल से बदलकर कैलिब्रेटेड टाइटनिंग कर दिया है। इसका मतलब है कि ब्याज दरों में और वृद्धि हो सकती है, लेकिन वह नियंत्रित और सोच-समझकर होगी। इससे आर्थिक स्थिरता और महंगाई नियंत्रण में मदद मिलेगी।
यह नीति संकेत देती है कि निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की संभावना नहीं है। इस कदम से निवेशकों और उपभोक्ताओं को स्पष्ट दिशा मिलती है।
बैठक में शामिल प्रमुख सदस्य और उनके विचार
63वीं एमपीसी बैठक में डॉ. नागेश कुमार, श्री सौगत भट्टाचार्य, प्रो. राम सिंह, डॉ. पूनम गुप्ता और श्री इंद्रनील भट्टाचार्य भी शामिल थे। सभी सदस्यों ने आर्थिक सुधारों और मुद्रास्फीति नियंत्रण के लिए उठाए गए कदमों का समर्थन किया।
समिति ने वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था की मजबूती को रेखांकित किया और सतर्कता के साथ नीतिगत निर्णय लिए।
भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती पर वैश्विक नजरें
हालांकि एशियाई विकास बैंक ने भारत की ग्रोथ अनुमान में कुछ कमी की है, फिर भी भारत विश्व में सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। IMF और अन्य संस्थान भी भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत को मान्यता दे रहे हैं।
यह स्थिति भारत को निवेश आकर्षित करने और आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाने में मदद करेगी। वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत की अर्थव्यवस्था के तेज़ विकास से देश के आम नागरिकों को रोजगार और आय के बेहतर अवसर मिलेंगे।



