मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में 24 ईवीएम चोरी नहीं हुई थी, बल्कि उनकी असलियत रिकॉर्ड में मिली है। इस मामले ने चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए थे, लेकिन जांच में पता चला कि ये मशीनें चोरी नहीं थीं।
24 ईवीएम गायब होने की खबर और भौतिक सत्यापन
अनूपपुर जिले में पुराने तहसील कार्यालय से 21 सितंबर 2026 को 24 ईवीएम मशीनें पॉलिटेक्निक कॉलेज शिफ्ट की गई थीं। इनमें 8 बैलेट यूनिट (BU) और 16 कंट्रोल यूनिट (CU) शामिल थीं। 24 से 28 सितंबर के बीच जब भौतिक सत्यापन किया गया तो ये मशीनें गायब पाई गईं। इस खबर ने प्रशासन और जनता में हड़कंप मचा दिया।
इसके तुरंत बाद जिला प्रशासन ने कोतवाली पुलिस में अज्ञात लोगों के खिलाफ चोरी का मामला दर्ज करा दिया।

चोरी नहीं, 2021 में खराब होने के बाद नष्ट की गईं थीं मशीनें
आगे की जांच में निर्वाचन कार्यालय की पुरानी फाइलों की समीक्षा की गई। अधिकारियों को उस दस्तावेज में पता चला कि ये 24 ईवीएम मशीनें चोरी नहीं हुई थीं। दरअसल, वर्ष 2021 में खराब होने के कारण इन्हें भोपाल भेज दिया गया था। वहाँ से इन्हें हैदराबाद स्थित ईसीआईएल कंपनी को भेजकर पूरी तरह नष्ट कर दिया गया था।
इस तथ्य ने इस पूरे विवाद का स्वरूप ही बदल दिया।
अधिकारियों की लापरवाही से मामला बढ़ा
उप जिला निर्वाचन अधिकारी एवं अपर कलेक्टर बलवीर रमण ने स्वीकार किया कि यह समस्या अधिकारियों की लापरवाही के कारण हुई। 2021 में जब मशीनें भोपाल भेजी गईं, तब निर्वाचन कार्यालय के पोर्टल पर इसकी ऑनलाइन एंट्री अपडेट नहीं की गई।
इस वजह से रिकॉर्ड में भ्रम पैदा हो गया और मशीनों के गायब होने की अफवाह फैल गई।
सियासी दलों ने जताई नाराजगी और मांगी जांच
मामला सार्वजनिक होते ही कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने प्रदर्शन किया। कोतमा के पूर्व विधायक सुनील सराफ ने जिला निर्वाचन अधिकारी को पत्र लिखकर मामले की एसआईटी जांच और स्टॉक रजिस्टर के पुनः सत्यापन की मांग की।
इससे स्पष्ट होता है कि चुनाव सुरक्षा को लेकर राजनीतिक दबाव भी इस मामले में बना रहा।
आम जनता पर चुनाव मशीनों के गायब होने का असर
चुनाव में इस्तेमाल होने वाली ईवीएम मशीनों का गायब होना आम जनता में चिंता पैदा करता है। हालांकि इस मामले में चोरी साबित नहीं हुई, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही ने मतदाताओं का भरोसा थोड़ा कमजोर किया है।
इसे सुधारने के लिए प्रशासन को पारदर्शिता बढ़ानी होगी और रिकॉर्ड का सटीक रखरखाव करना होगा।
आगे क्या हो सकता है इस मामले में
जिला प्रशासन ने मामले की गहन जांच का आश्वासन दिया है। संभावित है कि भविष्य में चुनाव उपकरणों के प्रबंधन के लिए सख्त नियम और तकनीकी सुधार लागू किए जाएं।
इसके अलावा, ऑनलाइन रिकॉर्ड अपडेट की प्रक्रिया को और मजबूत बनाने की दिशा में भी कदम उठाए जाएंगे।



