मेरठ नीला ड्रम मर्डर केस में मुस्कान-साहिल को कोर्ट ने दोषी ठहराया है। यह फैसला 30 सितंबर 2026 को मेरठ की जिला अदालत ने सुनाया। इस मामले में मृतक मर्चेंट नेवी अधिकारी सौरभ राजपूत की हत्या और साक्ष्य मिटाने की साजिश के आरोप में मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को दोषी पाया गया।
नीला ड्रम मर्डर केस की पृष्ठभूमि और घटना
मार्च 2025 में घटित इस सनसनीखेज घटना में मुस्कान ने अपने पति सौरभ के खाने में नशीला पदार्थ मिलाया। इसके बाद साहिल शुक्ला के साथ मिलकर उन्होंने सौरभ की चाकू से हत्या कर दी। हत्या के बाद शव के टुकड़ों को एक नीले प्लास्टिक ड्रम में रखा गया। ड्रम को सीमेंट, रेत और कंक्रीट के मिश्रण से सील कर दिया गया ताकि बदबू और साक्ष्य छुपाए जा सकें।
👉 यह भी पढ़ें:
- उत्तर प्रदेश में भारी बारिश से तबाही, 56 मौतें और हजारों घर क्षतिग्रस्त
- UP राजनीति: हसीन जहां ने शमी के चुनावी क्षेत्र से लड़ने की कर दी घोषणा
- बिजनौर की नूरानी मस्जिद के नीचे पुराने कुएं का दावा, हनुमान चालीसा पर विवाद
- लखनऊ: विवेक तिवारी हत्याकांड में प्रशांत चौधरी को 10 साल कैद
- 10 महीने पहले हुई लव मैरिज, प्रयागराज में दरोगा की पत्नी की मौत
- उत्तर प्रदेश में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 35 IPS अधिकारियों के तबादले

कोर्ट में चलाया गया लंबा और जटिल ट्रायल
नीला ड्रम मर्डर केस की सुनवाई करीब 13 महीने तक चली। इस दौरान कुल 126 पेशियां हुईं। अभियोजन पक्ष ने अदालत में 22 महत्वपूर्ण गवाहों और वैज्ञानिक साक्ष्यों को पेश किया। गवाहों में स्थानीय दुकानदार भी शामिल थे जिन्होंने हत्या में इस्तेमाल की गई वस्तुएं जैसे नीला प्लास्टिक ड्रम, सीमेंट की बोरियां, और छुरे बेचे थे।
कोर्ट ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनाया फैसला
सुनवाई के दौरान मुस्कान और साहिल को जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में पेश किया गया। जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा ने दोनों को दोषी ठहराया और कहा कि इस तरह के जघन्य अपराध समाज में भय का माहौल बनाते हैं। उन्होंने दोनों से पूछा कि क्यों न अधिकतम सजा दी जाए। हालांकि सजा का ऐलान 14 अक्टूबर 2026 को किया जाएगा।

परिवार और अभियोजन पक्ष की फांसी की मांग
सौरभ की मां, रेनू राजपूत, ने दोनों दोषियों के लिए फांसी की सजा की मांग की है। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि इस अपराध के लिए फांसी ही उचित सजा होनी चाहिए। अभियोजन पक्ष ने भी अदालत से मृत्युदंड की मांग की है।
आम जनता पर इस फैसले का प्रभाव
नीला ड्रम मर्डर केस का यह फैसला समाज में कानून व्यवस्था और अपराध नियंत्रण के प्रति एक सशक्त संदेश माना जा रहा है। ऐसे जघन्य अपराधों पर सख्त कार्रवाई से आम जनता में सुरक्षा की भावना बढ़ेगी और अपराधियों के मनोबल में कमी आएगी।
आगे की कानूनी प्रक्रिया और संभावनाएं
अब अदालत 14 अक्टूबर को सजा का निर्धारण करेगी। इस मामले में मृत्युदंड या आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा सकती है। दोनों आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य इतने मजबूत हैं कि न्यूनतम सजा की संभावना कम नजर आती है। इस फैसले के बाद संभव है कि दोनों पक्ष उच्च न्यायालय में अपील करें।



