जबलपुर में बनने वाली 300 नई धनुष तोपें भारतीय सेना की मारक क्षमता को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएंगी। धनुष तोप परियोजना के तहत इस बार 44 किमी से अधिक की मारक क्षमता वाली तोपें तैयार की जाएंगी, जो सेना के लिए सामरिक ताकत में इजाफा साबित होंगी।
धनुष तोप परियोजना का विस्तृत परिचय
धनुष तोप परियोजना भारतीय सेना के लिए स्वदेशी रूप से विकसित एक उन्नत आर्टिलरी गन है। जबलपुर की गन कैरिज फैक्ट्री (GCF) इस परियोजना के तहत 300 नई धनुष हॉवित्जर तोपों का निर्माण करेगी। यह तोपें 155 मिलीमीटर कैलिबर और 45-कैलिबर डिजाइन पर आधारित हैं। इन्हें ‘देसी बोफोर्स’ भी कहा जाता है क्योंकि इनका डिजाइन 1980 के दशक की स्वीडिश बोफोर्स तोप से प्रेरित है।
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मारक क्षमता में वृद्धि और स्वदेशीकरण
धनुष तोप की मारक क्षमता को वर्तमान में 38 किलोमीटर से बढ़ाकर 44 किलोमीटर से अधिक किया जाएगा। यह उन्नयन तोप के प्रभावशीलता क्षेत्र का विस्तार करेगा। इसके साथ ही, इस तोप का 95% हिस्सा अब स्वदेशी कलपुर्जों से निर्मित होता है, जो 2012 में केवल 21% था। इस स्वदेशीकरण के कारण रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बड़ा बढ़ावा मिला है।
माउंटेन गन संस्करण और सेना की जरूरतें
नई धनुष तोपें खासतौर पर माउंटेन गन संस्करण में विकसित की जाएंगी। यह संस्करण पहाड़ी इलाकों के लिए उपयुक्त है और पुरानी टोड गनों की जगह लेगा। माउंटेन गन को ट्रक से आसानी से स्वचालित रूप से ले जाया जा सकेगा, जिससे सेना की गतिशीलता में सुधार होगा।

रक्षा मंत्रालय की मंजूरी और उत्पादन योजना
रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में 300 धनुष तोपों की खरीद को मंजूरी दी है। जबलपुर गन कैरिज फैक्ट्री के महाप्रबंधक राहुल चौधरी ने बताया कि इन तोपों की आपूर्ति अगले पांच वर्षों में चरणबद्ध तरीके से की जाएगी। इससे भारतीय सेना में लगभग 15 नई आर्टिलरी रेजिमेंट्स का गठन संभव होगा।
ऑपरेशन सिंदूर में धनुष तोप का प्रभावी प्रदर्शन
धनुष तोप की उत्पादन संख्या बढ़ाने का निर्णय ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इसके सटीक और सफल प्रदर्शन के बाद लिया गया। इस ऑपरेशन में धनुष तोप ने अपनी मारक क्षमता और विश्वसनीयता साबित की, जिससे सेना की लड़ाकू क्षमता में वृद्धि हुई।
धनुष तोप का प्रभाव और आगे की संभावनाएं
धनुष तोप परियोजना से भारतीय सेना की सामरिक स्थिति मजबूत होगी। आम जनता पर इसका सकारात्मक असर सुरक्षा के लिहाज से महसूस किया जाएगा। इसके अलावा, स्वदेशी उत्पादन से देश की रक्षा उद्योग को मजबूती मिलेगी। भविष्य में धनुष तोप के और उन्नत संस्करण विकसित होने की उम्मीद है, जो सेना की जरूरतों के अनुरूप होंगे।



