भागीरथपुरा की जांच रिपोर्ट आई सामने, जांच आयोग ने माना- हादसा नहीं, सिस्टम की नाकामी का नतीजा

Date:

AI Audio Companion Ready to stream
0:00
0:00 left


इंदौर। भागीरथपुरा दूषित पानी कांड की जांच कर रहे एक सदस्यीय आयोग ने अपनी अंतिम रिपोर्ट में इसे किसी एक अधिकारी की लापरवाही का नतीजा नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही तकनीकी खामियों, निगरानी की कमी, रखरखाव में लापरवाही और पाइपलाइन बदलने में प्रशासनिक देरी का सामूहिक परिणाम माना है। आयोग ने कहा है कि दूषित पानी की आपूर्ति की घटना रोकी जा सकती थी और इसके लिए जिम्मेदारी तय होना जरूरी है।

35 मौतें दर्ज, 22 गंदे पानी से

रिपोर्ट के मुताबिक 12 फरवरी 2026 तक भग़ीरथपुरा में 35 मौतें रिपोर्ट हुईं, जिनमें अस्पताल के रिकॉर्ड के आधार पर 22 मौतें मौजूदा जलजनित बीमारी के प्रकोप से संभावित रूप से जुड़ी पाई गईं। बाकी 13 मौतों के कारण अन्य बताए गए हैं। जांच में सामने आया कि बड़ी संख्या में मरीजों को उल्टी, दस्त, पेट दर्द, डिहाइड्रेशन और गैस्ट्रोएंटेराइटिस जैसी समस्याओं के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था। चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय में 14 वर्ष से कम उम्र के 38 बच्चों के भर्ती होने और एमजीएम मेडिकल कॉलेज में 43 मरीजों के गैस्ट्रोएंटेराइटिस से भर्ती होने का भी रिपोर्ट में उल्लेख है।

👉 यह भी पढ़ें:

52 में 50 पानी के नमूने टोटल कॉलीफॉर्म पॉजिटिव

जांच आयोग ने पानी के नमूनों की रिपोर्टों को महत्वपूर्ण आधार माना है। मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा लिए गए 52 नमूनों में से 50 में टोटल कॉलीफॉर्म और 40 में ई-कोलाई मिला। वहीं जिला पब्लिक हेल्थ लैब में जांचे गए 24 नमूनों में 18 असंतोषजनक पाए गए। एमजीएम मेडिकल कॉलेज की जांच में भी 24 में से 19 नमूने पीने योग्य नहीं मिले। नगर निगम के वर्ष 2025 के आंकड़ों को भी आयोग ने अहम माना है। 73 नमूनों में से 54 नमूनों में निर्धारित मानकों से अधिक मान मिले और 39 नमूनों में फीकल कॉलीफॉर्म पाया गया। रिपोर्ट के अनुसार इससे घटना के समय पानी के दूषित होने की पुष्टि होती है।

सीवर और पानी की पाइपलाइन का गलत लेआउट

आयोग ने पाया कि प्रभावित क्षेत्र में पानी की पाइपलाइन और सीवर लाइन कई जगह समानांतर और कुछ स्थानों पर एक-दूसरे को क्रॉस करती हुई बिछाई गई थीं। रिपोर्ट में इसे CPHEEO के तकनीकी मानकों के विपरीत बताया गया है। आयोग के मुताबिक पाइपलाइनों में लीकेज, दरार, खराब जोड़ और सीवर लाइन की स्थिति के कारण सीवेज के पेयजल लाइन में प्रवेश की संभावना बनी रही। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सीवर और पेयजल पाइपलाइन के बीच पर्याप्त दूरी, सही ऊंचाई और क्रॉसिंग पर सुरक्षा उपाय जरूरी थे।

नगर निगम के पास पुराने नक्शे तक नहीं

जांच के दौरान नगर निगम द्वारा यह बताया गया कि भग़ीरथपुरा की पेयजल पाइपलाइन का नेटवर्क 1999 से 2004 के बीच HUDCO प्रोजेक्ट के तहत बिछाया गया था। लेकिन पुराने लेआउट प्लान, ब्लूप्रिंट, डिजाइन ड्रॉइंग और अलाइनमेंट मैप उपलब्ध नहीं कराए जा सके। वहीं, सीवर नेटवर्क इससे पहले 1990 से 1995 के बीच बिछाया गया था। आयोग ने पुराने रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने और संबंधित दस्तावेज नहीं दिए जाने को भी गंभीरता से लिया है।

पाइपलाइन बदलने में देरी पर सवाल

रिपोर्ट में कहा गया है कि नगर निगम को पाइपलाइन की खराब स्थिति का पता था और क्षतिग्रस्त नेटवर्क को बदलने के प्रस्ताव भी बनाए गए थे। लेकिन टेंडर प्रक्रिया में बार-बार देरी, निरस्तीकरण, री-टेंडर और प्रशासनिक निष्क्रियता के कारण काम समय पर शुरू नहीं हो सका। आयोग ने स्पष्ट किया कि यदि टेंडर समय पर फाइनल होकर पाइपलाइन बदल दी जाती तो दूषित पानी की घटना को रोका जा सकता था। इसलिए टेंडर में देरी को महज प्रक्रियागत चूक नहीं माना जा सकता।

कई अफसर दोषी, विभागीय जांच की जरूरत

आयोग ने जिम्मेदारी को कई स्तरों पर बांटा है। रिपोर्ट में 1990-95 के दौरान सीवर प्रोजेक्ट और 1999-2004 के दौरान पेयजल पाइपलाइन के निर्माण से जुड़े अधिकारियों, नगर निगम के रखरखाव और निगरानी से जुड़े इंजीनियरों तथा पाइपलाइन बदलने के टेंडर से जुड़े अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं।

इन अफसरों पर शक का घेरा

रिपोर्ट में सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर संजीव कुमार श्रीवास्तव का भी उल्लेख करते हुए कहा गया है कि लंबे समय तक जिम्मेदार पद पर रहने के बावजूद पर्याप्त निरीक्षण, प्रिवेंटिव मेंटेनेंस, समय पर पाइपलाइन बदलने और निगरानी की व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की गई। वहीं सरोज कुमार प्रजापति के संबंध में रिपोर्ट में कहा गया है कि उन्हें पाइपलाइन लीकेज, अनधिकृत कनेक्शन, दूषित पानी की शिकायतों और पाइपलाइनों की स्थिति की जानकारी थी, फिर भी इन गंभीर जोखिमों को वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में लाने और सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने में कमी रही। आयोग ने यह भी कहा है कि अलग-अलग अवधि में तैनात रहे इंजीनियरों की भूमिका की विस्तृत विभागीय जांच की जानी चाहिए।

सरकारी व्यवस्था की भी सामूहिक जिम्मेदारी

रिपोर्ट में कहा गया है कि मामले की जिम्मेदारी केवल उन अधिकारियों तक सीमित नहीं की जा सकती जिन्होंने दशकों पहले पाइपलाइन बिछाई थी। पानी की सुरक्षा और नेटवर्क की निगरानी, मरम्मत और समय पर बदलाव नगर निगम के इंजीनियरिंग तंत्र की लगातार जिम्मेदारी थी। आयोग ने पूरे मामले को गवर्नेंस, प्रशासनिक अक्षमता और सिस्टम की विफलता से जुड़ा बताया है। रिपोर्ट के अनुसार लंबे समय तक कमजोर इंफ्रास्ट्रक्चर, निरीक्षण की कमी, प्रिवेंटिव मेंटेनेंस का अभाव, पानी की गुणवत्ता की अपर्याप्त निगरानी और सुधारात्मक कार्रवाई में देरी ने ऐसी परिस्थितियां पैदा कीं, जिनमें पेयजल दूषित हुआ।

मृतकों के परिवार को 10 लाख का मुआवजा

आयोग ने प्रभावित परिवारों के लिए मुआवजे की भी सिफारिश की है। रिपोर्ट में मृतक के परिवार को 10 लाख रुपये, अंतिम संस्कार के लिए 50 हजार रुपये तथा बच्चों की शिक्षा के लिए 5 लाख रुपये तक की सहायता का सुझाव दिया गया है। गंभीर रूप से बीमार लोगों के लिए बीमारी की प्रकृति के अनुसार 2 से 3 लाख रुपये तक और मामूली बीमारी के लिए 50 हजार रुपये की सहायता का प्रस्ताव है। साथ ही कम से कम पांच साल तक मुफ्त चिकित्सा, नियमित स्वास्थ्य शिविर और सुरक्षित पेयजल व्यवस्था की सिफारिश की गई है।

आयोग ने कहा- घटना टाली जा सकती थी

अंतिम टिप्पणी में आयोग ने कहा है कि घटना रोकथाम योग्य थी। रिपोर्ट के मुताबिक पेयजल और सीवर लाइन को निर्धारित मानकों के विपरीत बिछाना गंभीर लापरवाही का आधार बन सकता है और ऐसी स्थिति में संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। अंतिम निष्कर्ष में आयोग ने कहा कि भग़ीरथपुरा में दूषित पानी की घटना कोई अलग-थलग या अपरिहार्य घटना नहीं थी, बल्कि व्यवस्थागत खामियों, लापरवाही और कर्तव्य निर्वहन में विफलता का परिणाम थी। आयोग ने अपनी अंतिम रिपोर्ट मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के विचारार्थ प्रस्तुत की है।

Harish Fatehchandani
Harish Fatehchandanihttp://www.hbtvnews.com
Harish Fatehchandani is a dedicated journalist with over a decade of experience in the media field. He is respected for his consistent and honest reporting.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

Recent News
Related

जबलपुर में बनेगी 300 नई धनुष तोपें, सेना को 44 किमी से ज्यादा मारक क्षमता

जबलपुर में 300 नई धनुष तोपें बनेंगी, जिनकी मारक क्षमता 44 किमी से अधिक होगी। यह स्वदेशी माउंटेन गन संस्करण भारतीय सेना के लिए अहम है।

जालंधर में अमित शाह की रैली में BJP कार्यकर्ता की हार्ट अटैक से मौत

जालंधर में अमित शाह की रैली में भाजपा कार्यकर्ता की हार्ट अटैक से मौत हुई। रजनीश सहगल की अचानक तबीयत बिगड़ी और अस्पताल में उनका निधन हो गया।

इंदौर में 1 अक्टूबर से दूध ₹3 महंगा, अब ₹68 प्रति लीटर मिलेगा

इंदौर में दूध की कीमतों में वृद्धि। 1 अक्टूबर से दूध ₹68 प्रति लीटर मिलेगा। होम डिलीवरी पर ₹1 अतिरिक्त सेवा शुल्क भी लगेगा।

20 विपक्षी दलों ने बनाई रणनीति, 6 अक्टूबर को चुनाव आयोग तक मार्च का फैसला

20 विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग तक मार्च की रणनीति बनाई है। 6 अक्टूबर को विरोध मार्च और 2 से 8 अक्टूबर तक लोकतंत्र बचाओ अभियान चलेगा।

Metal-Pharma स्टॉक्स के दबाव से Sensex 48 अंक गिरा, Nifty 22620 पर बंद

मेटल-फार्मा स्टॉक्स के दबाव से सेंसेक्स 48 अंक गिरा। निफ्टी 22,620.45 पर बंद। विदेशी निवेशकों की बिकवाली बाजार पर असर डाल रही है।

अमित शाह का बड़ा ऐलान: 31 दिसंबर 2029 तक पंजाब को चिट्टा मुक्त करेंगे

अमित शाह ने पंजाब को 31 दिसंबर 2029 तक चिट्टा मुक्त करने का बड़ा ऐलान किया है। यह घोषणा नशा मुक्त पंजाब यात्रा के समापन पर की गई।

सुप्रीम कोर्ट ने दीपावली पर पटाखों पर पूरी तरह प्रतिबंध से किया इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने दीपावली पर पटाखों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने से इनकार किया। अदालत ने समय-सीमा तय करने पर सहमति जताई।

वोटर रजिस्ट्रेशन के फार्म-6 से हटाई गई माता-पिता की वोटर जानकारी की घोषणा

वोटर रजिस्ट्रेशन के फार्म-6 से माता-पिता की वोटर जानकारी की घोषणा हटाई गई है। यह बदलाव नए मतदाताओं के लिए प्रक्रिया को सरल बनाता है।

अरब सागर में 5 पाकिस्तानी पकड़े, 3000 करोड़ के ड्रग्स बरामद

अरब सागर में 5 पाकिस्तानी गिरफ्तार, 526 किलो ड्रग्स जब्त। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत 3000 करोड़ से अधिक है। भारतीय तटरक्षक बल और ATS की संयुक्त कार्रवाई।

भोपाल में सोयाबीन तेल से भरा टैंकर पलटा, सड़क पर फैल गया तेल

भोपाल में सोयाबीन तेल से भरा टैंकर पलटा, जिससे सड़क पर तेल फैल गया। पुलिस ने जल्दी स्थिति संभाली और यातायात बहाल किया।