इंदौर में झांकियों की भव्य परंपरा ने अनंत चतुर्दशी 2026 के अवसर पर एक बार फिर अपनी छाप छोड़ी। इस वर्ष की सबसे प्रमुख झांकी के रूप में राजकुमार मिल की झांकी ने प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया। इस झांकी का विषय था “भगवान विष्णु और असुर मधु-कैटभ का युद्ध”, जिसने दर्शकों का मन मोह लिया।
इंदौर में झांकियों की परंपरा का ऐतिहासिक महत्व
इंदौर में झांकियों की यह परंपरा करीब 103 वर्षों से चली आ रही है। इसकी शुरुआत 1923-24 में हुकुमचंद मिल से हुई थी। अनंत चतुर्दशी के दिन आयोजित यह चल समारोह धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है।
प्रत्येक वर्ष झांकियों के साथ अखाड़ों के प्रदर्शन भी होते हैं, जो इस आयोजन को और भी रंगीन और जीवंत बनाते हैं। यह परंपरा न केवल धार्मिक बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक पहचान का भी माध्यम है।

राजकुमार मिल की झांकी को मिला प्रथम पुरस्कार
इस वर्ष राजकुमार मिल की झांकी को प्रथम स्थान दिया गया। इस झांकी का विषय “भगवान विष्णु और असुर मधु-कैटभ का युद्ध” था, जिसमें भगवान विष्णु के युद्ध कौशल और धर्म की विजय को दर्शाया गया।
झांकी की सजावट और तकनीकी प्रभावों ने इसे और भी आकर्षक बना दिया। कलाकारों ने अत्याधुनिक तकनीक और कलात्मक शैली का उपयोग कर इस झांकी को विशेष बनाया।
अखाड़ों के प्रदर्शन और पुरस्कार
अखाड़ों के प्रदर्शन में चंद्रपाल उस्ताद व्यायामशाला और श्री बिंदागुरु व्यायामशाला को संयुक्त प्रथम स्थान दिया गया। वहीं महिला अखाड़ा वर्ग में श्री रामनाथ गुरु व्यायामशाला ने यह सम्मान प्राप्त किया।
यह पुरस्कार अखाड़ों के उत्कृष्ट प्रदर्शन को मान्यता देने के लिए हैं। इन अखाड़ों ने अपनी कला और परंपरागत व्यायाम कौशल से समारोह को और भी मनोरंजक बनाया।

जिला प्रशासन की भूमिका और प्रोत्साहन
इंदौर के कलेक्टर शिवम वर्मा ने सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं को प्रोत्साहित करने के लिए नकद पुरस्कारों की घोषणा की। सभी बालक और बालिका कलाकारों को 10-10 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
यह कदम युवाओं को पारंपरिक कला और संस्कृति से जुड़ने के लिए प्रेरित करेगा। जिला प्रशासन की यह पहल परंपरा को जीवित रखने में सहायक होगी।
झांकियों में आधुनिक तकनीक का समावेश
इस वर्ष झांकियों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, त्रिआयामी तकनीक और हाइड्रोलिक प्रणाली जैसे आधुनिक तकनीकी प्रभावों का प्रयोग हुआ। इससे झांकियों की प्रस्तुति और भी प्रभावशाली बनी।
इस तकनीकी बदलाव से न केवल स्थानीय दर्शकों बल्कि इंटरनेट के माध्यम से देश-विदेश के लोग भी इस सांस्कृतिक समृद्धि का आनंद ले पा रहे हैं।
परंपरा का भविष्य और सामाजिक प्रभाव
103 वर्ष पुरानी झांकियों की परंपरा इंदौर के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है। यह आयोजन न केवल धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि युवाओं को उनकी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का एक माध्यम भी है।
आगे भी इस परंपरा को नई तकनीकों और युवा प्रतिभाओं के साथ मजबूत किया जाएगा, जिससे यह जीवंत और प्रासंगिक बनी रहेगी।



