इंदौर में अनंत चतुर्दशी झांकी परंपरा इस साल 103 वर्षों की विरासत के साथ मनाई जाएगी। यह प्राचीन परंपरा हर वर्ष अनंत चतुर्दशी के मौके पर भव्य झांकियों के कारवां के रूप में शहर की सड़कों पर उत्साहजनक रूप से निकलती है। इस बार 25 सितंबर 2026 को शाम 6 बजे से 22 से अधिक झांकियों का आकर्षक कारवां शहर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरेगा।
इंदौर में अनंत चतुर्दशी झांकी परंपरा की लंबी इतिहास
103 वर्षों से चली आ रही इंदौर की अनंत चतुर्दशी झांकी परंपरा की शुरुआत 1924 में हुकुमचंद मिल के श्रमिकों ने की थी। तब से यह उत्सव शहर के सांस्कृतिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। वर्षों से यह परंपरा न केवल धार्मिक श्रद्धा का प्रतीक रही है, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक मेलजोल का माध्यम भी बनी है।
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झांकियों के माध्यम से पौराणिक कथाओं, सामाजिक संदेशों और स्थानीय संस्कृति को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया जाता है, जिससे यह उत्सव हर उम्र के लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र रहता है।

25 सितंबर को शहर में निकलेगा 22 झांकियों का भव्य कारवां
इस वर्ष अनंत चतुर्दशी पर 22 से अधिक झांकियां तैयार की गई हैं, जो शाम 6 बजे डीआरपी लाइन चौराहा से शुरू होकर चिकमंगलूर चौराहा, जेल रोड, एमजी रोड, मृगनयनी, फ्रूट मार्केट, नंदलालपुरा, जवाहर मार्ग, नृसिंह बाजार, क्लॉथ मार्केट, खजूरी बाजार और राजवाड़ा होते हुए अपने गंतव्य तक पहुंचेंगी।
प्रत्येक झांकी में भगवान गणेश, देवी दुर्गा, भगवान शंकर से जुड़ी पौराणिक कथाओं के साथ-साथ नारी शक्ति और नशामुक्ति जैसे सामाजिक मुद्दों को भी खूबसूरती से दिखाया जाएगा।
प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर की कड़ी तैयारियां
इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा, पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह और नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल ने चल समारोह की सुरक्षा और सुचारू संचालन के लिए पूरे मार्ग का निरीक्षण किया है। उन्होंने सड़क मरम्मत और बिजली के तारों की दुरुस्ती के निर्देश भी दिए हैं।
इस बार पहली बार फेस रिकग्निशन कैमरों का इस्तेमाल सुरक्षा के लिए किया जाएगा। इसके अलावा, ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों से भी पूरे मार्ग की निगरानी की जाएगी ताकि भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

यातायात प्रतिबंध और डायवर्जन योजना लागू होगी
अनंत चतुर्दशी के दिन दोपहर 3 बजे से झांकी मार्ग पर सामान्य वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। प्रशासन ने डायवर्जन योजना बनाई है ताकि ट्रैफिक जाम न हो और लोगों को आवागमन में सुविधा मिले।
इस प्रतिबंध के कारण आम जनता को कुछ असुविधा हो सकती है, लेकिन सुरक्षा और आयोजन की सफलता के लिए यह आवश्यक कदम माना जा रहा है।
झांकी निर्माण में बढ़ती महंगाई ने बढ़ाई चुनौतियां
झांकी आयोजकों ने बताया कि बढ़ती महंगाई के कारण एक झांकी तैयार करने पर 8 से 10 लाख रुपये तक का खर्च आता है। मिलों के बंद होने के बावजूद, परंपरा को जीवित रखने के लिए संगठनों ने प्रशासन से वित्तीय सहायता और पुरस्कार राशि बढ़ाने की मांग की है।
इस आर्थिक दबाव के बावजूद, कलाकार और श्रमिक पूरी मेहनत से झांकियों को आकर्षक और जीवंत बनाने में जुटे हैं।
झांकी परंपरा से शहर के लोगों को सांस्कृतिक और सामाजिक जुड़ाव
इंदौर की अनंत चतुर्दशी झांकी परंपरा केवल धार्मिक उत्सव नहीं है, बल्कि यह शहर के विभिन्न समुदायों को जोड़ने वाला सांस्कृतिक उत्सव भी है। मुस्लिम बच्चियां भी मिल परिसरों में झांकियां देखने पहुंची, जो इस परंपरा की सामाजिक समावेशिता को दर्शाता है।
इस परंपरा से शहर के लोगों में सांस्कृतिक चेतना बढ़ती है और वे एक साथ मिलकर अपने इतिहास और सांस्कृतिक विरासत का जश्न मनाते हैं।



