कहीं राहुल गांधी के कार्यक्रम से डर तो नहीं गई भाजपा, आनन-फानन में नितिन नवीन के दौरे का क्या अर्थ लगाएं?
इंदौर। कांग्रेस नेता राहुल गाधी 19 नवंबर को छात्रों की गूंज कार्यक्रम के लिए इंदौर आ रहे हैं। राहुल का कार्यक्रम काफी पहले से तय था, इसकी तारीख भी बढ़ाई गई है। इस बीच अचानक खबर आई कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन 17 सितंबर को इंदौर आएंगे। यह महज एक संयोग नहीं है, क्योंकि पहले इस कार्यक्रम की चर्चा कहीं नहीं थी। इसे भाजपा बड़ी रणनीति कहा जा रहा है। युवा राजनीति के साथ ही संगठन को सक्रिय करने और राहुल गांधी के कार्यक्रम के जवाब के तौर पर भाजपा यह कवायद कर रही है।
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कार्यक्रम की टाइमिंग को लेकर उठ रहे सवाल
नितिन नवीन इंदौर में स्वामित्व योजना के राज्य स्तरीय कार्यक्रम में शामिल होंगे। इसके बाद उनके उज्जैन सहित कई अन्य कार्यक्रम भी हैं। इंदौर का कार्यक्रम सरकारी और संगठनात्मक हैं, लेकिन उनकी टाइमिंग महत्वपूर्ण है। सवाल यह है कि आखिर ऐसी क्या जल्दी थी कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का दौरा राहुल गांधी के कार्यक्रम से महज 48 घंटे पहले हो रहा है।
भाजपा को सताने लगा है युवाओं का डर
जब से दिल्ली के जंतर-मंतर पर सीजेपी का प्रदर्शन हुआ है, तब से भाजपा को युवाओं का डर सताने लगा है। इसी डर की वजह से शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हुआ। कांग्रेस ने भाजपा के इसी डर को भुनाने की कोशिश शुरू कर दी, जिसके तहत राहुल गांधी का ‘छात्रों की गूंज’ अभियान पूरे देश में आयोजित हो रहा है। इसमें राहुल वे मुद्दे उठाते हैं, जिनसे भाजपा डरी हुई है।
अब युवाओं से सीधे संवाद कर रही भाजपा
भाजपा भी अब इन मुद्दों पर सीधे युवाओं से संवाद करने की रणनीति पर आगे बढ़ती दिखाई दे रही है। पार्टी की ओर से कहा जा रहा है कि छात्रों की समस्याएं सुनी जाएंगी और उनके समाधान पर काम किया जाएगा। भाजपा नेताओं ने राहुल गांधी के छात्र संवाद कार्यक्रमों की गंभीरता और उनके राजनीतिक उद्देश्य पर भी सवाल उठाए हैं। ऐसे में नवीन का दौरा सिर्फ एक कार्यक्रम में शामिल होने का मामला नहीं रह जाता। यह इस बात का संकेत भी माना जा रहा है कि भाजपा युवाओं के बीच कांग्रेस को खुला मैदान देने के मूड में नहीं है।
राहुल गांधी के कार्यक्रम को मिल रहा समर्थन
पहले भाजपा ने राहुल गांधी के कार्यक्रम को हलके में लिया था। आयोजन स्थल के विवाद के बीच राहुल का कार्यक्रम बढ़ाया भी गया। इस बीच कांग्रेस को युवाओं का बड़े पैमाने पर समर्थन मिला। इस कार्यक्रम के लिए युवा लगातार रजिस्ट्रेशन करा रहे हैं। ऐसे में भाजपा को यह डर सताने लगा कि कहीं राहुल का कार्यक्रम सफल हो गया तो कहीं नाक न कट जाए।
मालवा में लगातार तीन दिन बड़े चेहरे
राहुल के दौरे के कारण अचानक भाजपा ने मालवा पर फोकस किया। नितिन नवीन के कार्यक्रम के अलावा संघ प्रमुख मोहन भागवत का कार्यक्रम भी बना लिया गया। संघ प्रमुख मोहन भागवत 17 और 18 सितंबर को उज्जैन में रहेंगे। 17 सितंबर को उनका कोई सार्वजनिक कार्यक्रम प्रस्तावित नहीं है। 18 सितंबर को वे देवास रोड स्थित गीता भवन में ‘युवा धर्म संसद’ में युवाओं से संवाद करेंगे।
युवाओं के हिसाब से इंदौर का बड़ा महत्व
युवाओं के हिसाब से इंदौर का अलग ही महत्व है। इंदौर मालवा-निमाड़ ही नहीं बल्कि एमपी का बडा शैक्षणिक केंद्र है। बड़ी संख्या में कॉलेज, विश्वविद्यालय, कोचिंग संस्थान और दूसरे राज्यों से आने वाले विद्यार्थी यहां हैं। इसलिए युवा मतदाताओं तक पहुंच बनाने के लिए इंदौर का चुनाव अपने आप में रणनीतिक माना जा सकता है। राहुल गांधी ने भी इसी वजह से अपने छात्र-केंद्रित कार्यक्रम के लिए इंदौर को चुना है। कांग्रेस के लिए यह सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि युवाओं के बीच अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने का अवसर है। भाजपा के सामने चुनौती यह है कि युवा वर्ग के बीच रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं, शिक्षा और भविष्य को लेकर सवाल लगातार बने हुए हैं। इसलिए पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का इंदौर दौरा संगठन के साथ-साथ इन मुद्दों पर पार्टी का संदेश मजबूत करने का मौका भी है।
युवाओं को रिझाने में लगी दोनों पार्टियां
तीन दिनों में होने वाले इन कार्यक्रमों के केंद्र में कहीं न कहीं युवा हैं। एक ओर मोहन भागवत ‘युवा धर्म संसद’ के जरिए युवाओं से वैचारिक और सामाजिक मुद्दों पर संवाद करेंगे, वहीं राहुल गांधी छात्रों और युवाओं के बीच कांग्रेस का राजनीतिक संदेश रखने की तैयारी में हैं। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन का दौरा भी सेवा, विकास और जनकल्याण से जुड़े कार्यक्रमों के जरिए पार्टी की मौजूदगी मजबूत करने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है।



