इंदौर में बैंक धोखाधड़ी मामले में ED ने 3.91 करोड़ की संपत्ति अटैच की

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इंदौर में बैंक धोखाधड़ी मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने लगभग 3.91 करोड़ रुपए मूल्य की संपत्ति अटैच की है। यह कार्रवाई धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े इस गंभीर मामले में की गई है।

ईडी ने इंदौर में 3.91 करोड़ की संपत्ति अटैच की

प्रवर्तन निदेशालय के इंदौर उप-क्षेत्रीय कार्यालय ने बैंक धोखाधड़ी मामले में 3.91 करोड़ रुपए की जमीन और 18 संपत्तियों को अटैच किया है। ये संपत्तियां हुक्माखेड़ी गांव में स्थित तीन वाणिज्यिक भूमि हैं, जो एम/एस विश्वकर्मा क्रिएशंस प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर दर्ज हैं।

यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत की गई है। ईडी के अनुसार, ये संपत्तियां नियो कॉर्प इंटरनेशनल लिमिटेड और उससे जुड़ी कंपनियों द्वारा की गई बैंक धोखाधड़ी से अर्जित धन से खरीदी गई थीं।

बैंक धोखाधड़ी मामले की जांच के तहत कार्रवाई

ईडी की जांच में सामने आया कि संबंधित कंपनियों ने विभिन्न सरकारी बैंकों को 307.44 करोड़ रुपए का नुकसान पहुंचाया था। इस मामले में दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज थीं।

पहली एफआईआर में पंजाब नेशनल बैंक को 57.47 करोड़ रुपए का नुकसान बताया गया था, जबकि दूसरी एफआईआर में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया को 249.97 करोड़ रुपए के नुकसान का आरोप है। दोनों मामलों की जांच सीबीआई और ईडी कर रही हैं।

संपत्तियों की अस्थायी कुर्की का आदेश

ईडी ने 10 सितंबर 2026 को इन संपत्तियों की अस्थायी कुर्की का आदेश जारी किया। यह आदेश बैंक धोखाधड़ी से अर्जित आपराधिक आय को रोकने और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच को मजबूत करने के लिए है।

संपत्तियों को जब्त करने से संबंधित कंपनियों की वित्तीय संपत्तियों पर नियंत्रण स्थापित किया गया है, जिससे वे धन को अन्यत्र स्थानांतरित नहीं कर सकें।

धनशोधन और मनी ट्रेल की जांच

ईडी ने पाया कि धोखाधड़ी के पैसे को कई स्तरों पर स्थानांतरित कर छिपाया गया। सुनील कुमार त्रिवेदी और उत्कर्ष त्रिवेदी द्वारा नियंत्रित मध्यस्थ कंपनियों के माध्यम से यह रकम घुमाई गई।

इस मनी ट्रेल को ट्रैक करते हुए, एजेंसी ने संपत्तियों को अटैच किया ताकि अपराध से अर्जित धन के अवैध उपयोग को रोका जा सके।

आम जनता पर संभावित असर

बैंक धोखाधड़ी से सरकारी बैंकों को बड़ा नुकसान होता है, जो अंततः आम जनता को प्रभावित करता है। इससे बैंकों के वित्तीय संसाधन कम होते हैं और कर्ज़ उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।

इस मामले में ईडी की कार्रवाई से यह संदेश जाता है कि वित्तीय अपराधों पर कड़ी नजर रखी जा रही है। इससे भविष्य में धोखाधड़ी के मामलों में कमी आ सकती है।

आगे की कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया

ईडी की जांच अभी जारी है और जल्द ही और भी संपत्तियों की पहचान कर कार्रवाई की संभावना है। इसके अलावा, आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया भी तेज होगी।

अगले चरण में अदालत में मामले की सुनवाई होगी, जहां इस मामले से जुड़े सभी सबूत पेश किए जाएंगे। यह कार्रवाई भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ सख्त कदम साबित होगी।

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