मध्य प्रदेश में बौद्ध विहार के पते पर जाली पासपोर्ट बनाने का एक बड़ा मामला सामने आया है। पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने सितंबर 2026 के पहले हफ्ते में इस घोटाले का पर्दाफाश किया।
डबरा और भोपाल में फर्जी पासपोर्ट का खुलासा
एसटीएफ की जांच में पता चला कि डबरा के सिमरिया टेकरी और भोपाल के गोविंदपुरा स्थित बौद्ध मठ के पते पर 70 से अधिक फर्जी पासपोर्ट जारी हुए। इनमें से 20 से 22 पासपोर्ट डबरा से और 40 पासपोर्ट भोपाल के पते से जारी हुए थे।
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मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी
इस फर्जीवाड़े में शामिल दो मुख्य आरोपी, सरगना रियाल चौधरी और उसके सहयोगी विप्लव अधिकारी को एसटीएफ ने गिरफ्तार किया है। गिरोह स्थानीय पते का उपयोग कर बांग्लादेशी नागरिकों के लिए जाली दस्तावेज तैयार करता था।
बौद्ध अनुयायी बनकर विदेश यात्राएं
इन जाली पासपोर्ट के सहारे, कई बांग्लादेशी नागरिक बौद्ध अनुयायी बनकर थाईलैंड, मलेशिया, चीन, श्रीलंका और जापान जैसे देशों की यात्राएं कर चुके हैं। यह सब बौद्ध भिक्षु के वेश में किया जाता था।
अंतरराज्यीय नेटवर्क का पता
जांच में यह भी पाया गया कि इस गिरोह का नेटवर्क मध्य प्रदेश के अलावा असम, कोलकाता और पश्चिम बंगाल तक फैला हुआ है। एसटीएफ की टीमें इन राज्यों में भी जांच कर रही हैं।
स्थानीय सत्यापन में लापरवाही
यह सवाल भी उठता है कि पासपोर्ट जारी होने से पहले होने वाले पुलिस और स्थानीय सत्यापन में इतनी बड़ी गड़बड़ी कैसे हो गई। एक ही पते से दर्जनों पासपोर्ट जारी होने के बावजूद यह गड़बड़ी पकड़ में नहीं आ सकी।
आगे की जांच की दिशा
फिलहाल, एसटीएफ इस मामले की गहराई से जांच कर रही है। अन्य राज्यों में जाकर नेटवर्क के दूसरे सदस्यों और दस्तावेज बनाने वालों की जानकारी जुटाई जाएगी।



