एससीओ फोटो विवाद ने एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव को उजागर किया है। 1 सितंबर 2026 को बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन के दौरान यह विवाद सामने आया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय से साझा की गई तस्वीर में जानबूझकर भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को क्रॉप कर दिया गया था।
पाकिस्तानी पीएमओ की हरकत
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय ने एससीओ सम्मेलन की ‘फैमिली फोटो’ को दोनों किनारों से क्रॉप कर पोस्ट किया। इस फोटो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन को हटा दिया गया। इसके चलते सोशल मीडिया पर तीखी आलोचना हुई। यह हरकत अंतरराष्ट्रीय मानकों और सम्मेलन की भावना के विरुद्ध मानी गई। पाकिस्तान का यह कदम उसकी अपनी कूटनीति को भी प्रभावित कर सकता है। सोशल मीडिया पर इस हरकत को लेकर पाकिस्तान की छवि को धक्का पहुंचा है।
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भारत की प्रतिक्रिया
भारत ने इस विवादास्पद कदम का तुरंत जवाब दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय पीएमओ ने बिना किसी संपादन के मूल फोटो को सोशल मीडिया पर जारी किया। इस तस्वीर में सभी 10 सदस्य देशों के नेता स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे थे। भारत ने इस घटना को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी अपनी चिंता व्यक्त की। भारतीय मीडिया और जनता ने भी इस पर अपनी नाराजगी जाहिर की। इस कदम को एक सोची-समझी रणनीति के रूप में देखा गया।
पाकिस्तान का बचाव
सोशल मीडिया पर आलोचना के बाद, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अपने व्यक्तिगत सोशल मीडिया अकाउंट से पूरी तस्वीर पोस्ट की। इसके बावजूद, इस हरकत को लेकर पाकिस्तान की काफी आलोचना हुई। उन्होंने इस घटना को ‘तकनीकी त्रुटि’ कहा, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह जानबूझकर किया गया था। पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति पर भी इसका असर पड़ सकता है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
भारत में इस कदम की कड़ी आलोचना हुई। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने इसे पाकिस्तान की असुरक्षा और ओछी हरकत करार दिया। उन्होंने कहा कि यह पाकिस्तान की कूटनीतिक अस्थिरता को दर्शाता है। विपक्षी दलों ने भी इस पर अपनी नाराजगी जाहिर की। भारतीय राजनीति में इस घटना ने कई सवाल खड़े किए हैं। क्या यह किसी बड़ी योजना का हिस्सा था?

आगे की संभावनाएं
इस घटना के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक संबंधों में और भी तनाव बढ़ सकता है। इस विवाद ने आर्थिक और राजनीतिक मंचों पर भी चर्चा को जन्म दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना के बाद दोनों देशों के बीच वार्ता की संभावना और कम हो गई है। कई लोगों का मानना है कि यह विवाद केवल एक शुरुआत है और आगे और भी जटिलताएं आ सकती हैं।
आम जनता पर असर
यह विवाद केवल नेताओं तक सीमित नहीं रहा। आम जनता के मन में भी इस घटना ने गुस्सा और चिंता पैदा की है। लोग सोशल मीडिया पर अपनी भावनाएं व्यक्त कर रहे हैं। भारत और पाकिस्तान के नागरिकों के बीच पहले से ही मौजूद अविश्वास और भी गहराता जा रहा है। इस घटना ने सीमा पार के संबंधों को और भी जटिल बना दिया है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने भी इस विवाद पर ध्यान दिया है। कई देशों ने दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की है। इस प्रकार की घटनाएं क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बन सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस विवाद का समाधान दोनों देशों के बीच संवाद से ही संभव है।



