Article 370 Abrogation 7 Years: जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 हटाए जाने के सात साल पूरे होने के मौके पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने 5 अगस्त की पूर्व संध्या पर केंद्र सरकार के 2019 के फैसले को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोग अपने अधिकारों और मुद्दों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त करते हुए संविधान के अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करने की घोषणा की थी। इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर को पुनर्गठित कर दो केंद्र शासित प्रदेश—जम्मू-कश्मीर और लद्दाख—बनाए गए थे।
👉 यह भी पढ़ें:
- शोपियां में बड़ी कार्रवाई: 2 हैंड ग्रेनेड और हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़े पोस्टर बरामद, 3 गिरफ्तार
- जम्मू-कश्मीर पर अमेरिका का बड़ा बयान, पाकिस्तान ने जताई आपत्ति; जानें क्यों बढ़ा विवाद
- उमर अब्दुल्ला का दावा- 370 नहीं हटता, तो भारत में शामिल होने के लिए लड़ रहे होते पीओके के लोग
- Amarnath Yatra ; बाबा बर्फानी के दर्शन होंगे और आसान, बालटाल व पहलगाम रूट पर बनेगा Ropeway, 40 मिनट में पहुंचेगी श्रद्धालुओं की यात्रा
- Monsoon Fury: देश के कई राज्यों में आसमान से आफत! 43 लोगों की मौत, जम्मू-कश्मीर से असम तक बाढ़-भूस्खलन का कहर
- Jammu Kashmir News: डोडा में SOG जवान की राइफल छीनने की कोशिश, फायरिंग में युवक की मौत; 3 पुलिसकर्मी घायल
इस फैसले के बाद से ही जम्मू-कश्मीर की राजनीति में आर्टिकल 370 एक प्रमुख मुद्दा बना हुआ है। सात साल पूरे होने के मौके पर एक बार फिर इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक बहस तेज होती दिखाई दे रही है।
‘जम्मू-कश्मीर के लोग मुर्दा नहीं, जिंदा कौम हैं’
महबूबा मुफ्ती ने 5 अगस्त की पूर्व संध्या पर अपने बयान में कहा कि “जम्मू-कश्मीर के लोग मुर्दा लोग नहीं हैं, हम जिंदा कौम हैं।” उन्होंने कहा कि PDP और जम्मू-कश्मीर के लोग मिलकर प्रदेश की समस्याओं के समाधान के लिए संघर्ष करेंगे।
उन्होंने आर्टिकल 370 और 35A को लेकर भी अपनी मांग दोहराई। महबूबा मुफ्ती ने कहा कि उनकी पार्टी जम्मू-कश्मीर के लोगों की समस्याओं के साथ-साथ अनुच्छेद 370, 35A और देश की अलग-अलग जेलों में बंद लोगों की रिहाई के लिए भी जद्दोजहद करेगी।
उनके इस बयान को जम्मू-कश्मीर की राजनीति में आर्टिकल 370 के मुद्दे को फिर से प्रमुखता देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। PDP लंबे समय से जम्मू-कश्मीर की विशेष संवैधानिक पहचान और राज्य के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक बहस का हिस्सा बनाती रही है।
‘हालात ठीक हैं तो सेना को सिविल एरिया से हटाएं’
महबूबा मुफ्ती ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सरकार से सवाल किया। उन्होंने कहा कि यदि सरकार का मानना है कि जम्मू-कश्मीर में हालात सामान्य हो गए हैं, तो सेना को सिविल इलाकों से हटाकर वापस बैरकों में भेजा जाना चाहिए।
उन्होंने अपने बयान में कहा कि मुजफ्फराबाद और रावलाकोट के लिए पहले जो रास्ते खुले थे, उन पर दोबारा व्यापार शुरू होना चाहिए।
यह बयान जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा, सीमा पार संपर्क और व्यापार को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, ऐसे मुद्दों पर केंद्र सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की अपनी सुरक्षा संबंधी प्राथमिकताएं और नीतियां हैं।
5 अगस्त 2019 को क्या हुआ था?
5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से जुड़े संविधान के अनुच्छेद 370 के अधिकांश प्रावधानों को प्रभावहीन करने का फैसला लिया था। इसके बाद संसद ने Jammu and Kashmir Reorganisation Act, 2019 पारित किया, जिसके तहत तत्कालीन राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में पुनर्गठित किया गया।
इस फैसले ने जम्मू-कश्मीर की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया। आर्टिकल 370 के तहत जम्मू-कश्मीर को प्राप्त विशेष संवैधानिक प्रावधानों को समाप्त करने के साथ ही राज्य का अलग संविधान और कई विशेष व्यवस्थाएं भी खत्म हो गईं।
इसके बाद केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर में विकास, निवेश, पर्यटन और बुनियादी ढांचे को लेकर कई योजनाओं पर जोर दिया। वहीं, क्षेत्रीय राजनीतिक दलों ने राज्य का दर्जा बहाल करने और जम्मू-कश्मीर की राजनीतिक पहचान से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाया है।
सात साल पूरे होने पर जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बढ़ी
आर्टिकल 370 हटाए जाने की सातवीं वर्षगांठ के मद्देनजर जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था को भी कड़ा किया गया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, 5 अगस्त को देखते हुए सुरक्षा बलों की तैनाती और निगरानी बढ़ाई गई है।
सुरक्षा एजेंसियां संवेदनशील इलाकों में विशेष सतर्कता बरत रही हैं। महत्वपूर्ण स्थानों पर सुरक्षा जांच बढ़ाने के साथ-साथ कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त इंतजाम किए गए हैं।
5 अगस्त का दिन जम्मू-कश्मीर के लिए राजनीतिक और ऐतिहासिक रूप से बेहद संवेदनशील माना जाता है। ऐसे में प्रशासन किसी भी अप्रिय घटना को रोकने और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए विशेष सुरक्षा इंतजाम करता है।
आर्टिकल 370 पर जारी है राजनीतिक बहस
आर्टिकल 370 को हटाए जाने के सात साल बाद भी यह मुद्दा जम्मू-कश्मीर की राजनीति में बेहद महत्वपूर्ण बना हुआ है। एक ओर केंद्र सरकार और उसके समर्थक इस फैसले को राष्ट्रीय एकीकरण, विकास और समान संवैधानिक व्यवस्था की दिशा में बड़ा कदम बताते हैं। दूसरी ओर PDP और अन्य क्षेत्रीय राजनीतिक दल इस फैसले के खिलाफ अपनी राजनीतिक और संवैधानिक आपत्तियां लगातार उठाते रहे हैं।
अब सवाल यह है कि आने वाले समय में जम्मू-कश्मीर की राजनीति किस दिशा में जाएगी। क्या राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग भविष्य की राजनीति का सबसे बड़ा मुद्दा बनेगी या विकास और रोजगार जैसे मुद्दे ज्यादा प्रभावी होंगे? साथ ही, आर्टिकल 370 को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों की रणनीति आने वाले चुनावों में किस तरह दिखाई देगी, यह भी देखने वाली बात होगी।
आपकी राय क्या है?
आर्टिकल 370 हटाए जाने के सात साल बाद जम्मू-कश्मीर में आपको सबसे बड़ा बदलाव किस क्षेत्र में नजर आता है—सुरक्षा, विकास, पर्यटन, रोजगार या राजनीति?
क्या आपको लगता है कि जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल किया जाना चाहिए? और महबूबा मुफ्ती की सेना को सिविल इलाकों से हटाने तथा पुराने व्यापारिक रास्ते खोलने की मांग पर आपकी क्या राय है?
अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें।



