नई दिल्ली: भारतीय अर्थव्यवस्था से जुड़ी एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। जुलाई में भारत के manufacturing sector की growth लगभग पांच साल के निचले स्तर पर पहुंच गई। S&P Global HSBC India Manufacturing Purchasing Managers’ Index यानी PMI जुलाई में घटकर 53.5 रह गया, जबकि जून में यह 54.2 था। यह अगस्त 2021 के बाद सबसे कमजोर स्तर है। हालांकि PMI का 50 से ऊपर रहना बताता है कि manufacturing activity अभी भी expansion यानी वृद्धि के दौर में है।
नए आंकड़े ऐसे समय आए हैं जब भारतीय अर्थव्यवस्था की गति, घरेलू मांग और रोजगार को लेकर बाजार की नजर बनी हुई है। PMI में गिरावट का सबसे बड़ा संकेत कमजोर demand से जुड़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक नए orders की वृद्धि चार साल से अधिक समय में दूसरी सबसे कमजोर गति पर रही। यानी कंपनियों के पास नए ऑर्डर आ तो रहे हैं, लेकिन उनकी रफ्तार पहले जैसी मजबूत नहीं है।
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Manufacturing sector भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका सीधा संबंध उत्पादन, रोजगार, निर्यात, निवेश और supply chain से है। यदि कंपनियों को पर्याप्त नए ऑर्डर नहीं मिलते तो उत्पादन बढ़ाने की जरूरत कम हो सकती है। लंबे समय तक ऐसी स्थिति बनी रहने पर नई भर्ती और निवेश योजनाओं की गति भी प्रभावित हो सकती है।
हालांकि रिपोर्ट में पूरी तस्वीर नकारात्मक नहीं है। जुलाई में export orders में सुधार देखने को मिला और यह अप्रैल के बाद सबसे तेज गति से बढ़े। लेकिन जून में निर्यात ऑर्डर 39 महीने के निचले स्तर पर पहुंच चुके थे, इसलिए जुलाई की बढ़त को अभी मजबूत recovery का संकेत नहीं माना जा सकता।

रोजगार के मोर्चे पर भी एक महत्वपूर्ण संकेत मिला है। Manufacturing sector में लगातार 29वें महीने hiring बढ़ी, लेकिन इस पूरी अवधि में जुलाई की hiring growth सबसे धीमी रही। इसका मतलब यह है कि उद्योग अभी भी लोगों को रोजगार दे रहा है, लेकिन नई नौकरियां पैदा करने की गति कमजोर हुई है।
एक सकारात्मक पहलू input cost inflation से जुड़ा है। जुलाई में input costs में महंगाई पांच महीने के निचले स्तर पर पहुंची। हालांकि transport costs बढ़ती रहीं। कंपनियों ने selling prices में केवल मामूली बढ़ोतरी की, जिससे ग्राहकों पर लागत का पूरा बोझ डालने की कोशिश नहीं दिखाई दी।
Business confidence में भी जून के मुकाबले थोड़ा सुधार हुआ। कुछ कंपनियों ने आने वाली मांग और infrastructure projects को लेकर सकारात्मक उम्मीद जताई। इसका अर्थ यह है कि उद्योग जगत पूरी तरह निराश नहीं है और उसे आने वाले महीनों में कुछ क्षेत्रों से बेहतर demand की उम्मीद है।
अब सबसे बड़ा सवाल घरेलू मांग का है। यदि consumption मजबूत होता है और infrastructure spending तथा investment activity बनी रहती है, तो manufacturing sector दोबारा गति पकड़ सकता है। लेकिन यदि नए orders की कमजोरी लंबे समय तक जारी रहती है, तो इसका असर उत्पादन और रोजगार दोनों पर पड़ सकता है।
अर्थव्यवस्था पर नजर रखने वालों के लिए PMI इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह आधिकारिक GDP आंकड़ों से पहले कारोबारी गतिविधियों की दिशा का संकेत देता है। जुलाई के आंकड़े यह बताते हैं कि भारत की manufacturing story अभी growth में है, लेकिन momentum कमजोर पड़ा है।
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आप क्या सोचते हैं—क्या कमजोर manufacturing growth आने वाले महीनों में रोजगार और कारोबार पर असर डाल सकती है, या infrastructure और domestic demand से जल्द सुधार दिखाई देगा? कमेंट में अपनी राय बताएं।



