नई दिल्ली। दिल्ली दंगों के आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट में पूर्व आम आदमी पार्टी पार्षद ताहिर हुसैन समेत अन्य चार दोषियों की सजा का एलान कर दिया है। कोर्ट ने पांचों दोषियों ताहिर हुसैन, नजीर, आसिम, जावेद और अनास को उम्र कैद की सजा सुनाई है।
उल्लेखनीय है कि अंकित शर्मा की हत्या 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़के दंगे के दौरान कर दी गई थी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह ने हुसैन को आईपीसी की धारा 188, 153ए, 147, 148, 149, 365 और 302 के तहत दोषी ठहराया है। हालांकि आईपीसी की धारा 120बी और 129 के तहत बरी कर दिया गया था।
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सजा सुनाते समय कोर्ट ने क्या कहा
उल्लेखनीय है कि 13 जुलाई 2026 को कोर्ट ने ताहिर हुसैन, नजीम , कासिम, अनस और जावेद को दोषी करार दिया था। आज फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने कहा कि अंकित को जानवरों की तरह मारा गया और मारने के बाद भी शव को नाले में फेंका गया। समाज को झकझोरने वाला मामला है। दोषियों के परिवार ने आश्रित होने की बात कहकर सजा कम करने की मांग बचाव पक्ष ने की है लेकिन इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। अभियोजन ने ताहिर के घर को दंगों का लॉन्च पैड बताया लेकिन ये इस केस के चार्ज से जुड़ा नहीं है। इसके साथ ही अदालत ने ताहिर हुसैन को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही कोर्ट ने अलग-अलग धाराओं में जुर्माना भी लगाया गया। हालांकि राज्य ने दोषियों के लिए मौत की सजा मांगी थी, लेकिन कोर्ट ने देखा कि प्रॉसिक्यूशन रिकॉर्ड में ऐसा कुछ भी पेश करने में नाकाम रहा जिससे पता चले कि पांचों दोषियों का स्वभाव हिंसक था या वे अपराधी थे। कोर्ट ने कहा कि दोषियों का पहले किसी भी अपराध में शामिल होने का कोई इतिहास नहीं था, और दोषियों को अनुशासन में रखा जा सकता था और नियम-आधारित आदेश का पालन करने के लिए कहा जा सकता था।
13 जुलाई को कोर्ट ने माना था दोषी
13 जुलाई को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह ताहिर हुसैन समेत कुल 11 आरोपियों के मामले की सुनवाई कर रहे थे। उन्होंने उनमें से पांच को दोषी ठहराया। अदालत ने ताहिर हुसैन को वैमनस्य फैलाने, दंगा करने, मारपीट, आपराधिक बल प्रयोग और हत्या के आरोपों में दोषी पाया। ताहिर हुसैन को आईपीसी की धाराओं 188, 153A, 147, 148, 149, 365 और 302 के तहत अपराधों के लिए दोषी करार दिया गया है। हालांकि उसे साजिश के आरोपों से बरी कर दिया गया है।
25 फरवरी 2020 का है मामला
यह मामला अंकित कुमार के पिता रवींद्र कुमार की शिकायत पर दयालपुर थाने में दर्ज प्राथमिकी से संबंधित है। रवींद्र कुमार के अनुसार आईबी में तैनात अंकित शर्मा 25 फरवरी 2020 को कार्यालय से घर लौटे थे और उसके बाद बाहर निकले थे। शिकायतकर्ता के मुताबिक, जब अंकित काफी देर तक वापस नहीं लौटे, तब परिवार वालों ने उन्हें खोजना शुरू किया।
अंकित के पिता ने लिया था ताहिर का नाम
रवींद्र कुमार के अनुसार, तभी स्थानीय लोगों ने उन्हें बताया कि उनके बेटे की हत्या कर दी गई है और उसका शव चांद बाग पुलिया इलाके में एक मस्जिद के पास खजूरी खास नाले में फेंक दिया गया है। बाद में अंकित शर्मा का शव नाले से बरामद किया गया। अपनी शिकायत में रवींद्र कुमार ने आरोप लगाया कि उनके बेटे की हत्या तत्कालीन आप पार्षद ताहिर हुसैन और अन्य लोगों ने की थी। शिकायत में कहा गया है कि ये लोग कथित तौर पर हुसैन के दफ्तर में जमा हुए थे और हत्या के बाद अंकित के शव को ठिकाने लगा दिया था। इस मामले में नाम आने के बाद ताहिर हुसैन को आम आदमी पार्टी ने निलंबित कर दिया था।
2023 में तय हुए थे आरोप
दिल्ली की एक अदालत ने 24 मार्च 2023 को ताहिर हुसैन और 10 अन्य लोगों के खिलाफ आरोप तय किए। इस मामले के अन्य आरोपी हसीन उर्फ मुल्लाजी उर्फ सलमान, नाज़िम, कासिम, समीर खान, अनस, फ़िरोज़, जावेद, गुलफ़ाम, शोएब आलम उर्फ बॉबी और मुंतजिम उर्फ मूसा हैं। आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता की उन धाराओं के तहत आरोप लगाए गए जो दंगा करने, घातक हथियारों के साथ दंगा करने, समूहों के बीच वैमनस्य को बढ़ावा देने, हत्या और आपराधिक साजिश से संबंधित हैं।
नाले में मिली थी अंकित शर्मा की लाश
ताहिर हुसैन, नजीर, आसिम, जावेद और अनास को छोड़कर इस मामले में अन्य तीन अभियुक्तों को जमानत मिल गई। हुसैन की जमानत याचिका पिछले साल सितंबर में हाई कोर्ट ने खारिज कर दी थी। यह मामला दयालपुर पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर से संबंधित है। अंकित के पिता की शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई थी। दंगों के दौरान जब उनका बेटा लापता हो गया था, तब उन्होंने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। अंकित का शव बाद में एक नाले से बरामद हुआ। इसके बाद उन्हें जीटीबी अस्पताल ले जाया गया जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।



