नई दिल्ली। भाजपा राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। सूत्रों के मुताबिक, जानकारी मिली है कि उन्होंने पार्टी की सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया है। शहजाद पूनावाला ने कुछ घंटे पहले सोशल मीडिया साइट एक्स पर किए गए पोस्ट में अपने प्रोफाइल का अपडेटेड बायो शेयर किया है। उनके नए बायो में कहीं भी भाजपा का जिक्र नहीं है।
बीजेपी नेता शहजाद पूनावाला ने अपने एक्स बायो से ‘नेशनल स्पोक्सपर्सन, भाजपा’ का पद हटा दिया है, जिससे उनके राजनीति छोड़ने की चर्चा शुरू हो गई है। इसके साथ ही, पूनावाला ने पुराने इंटरव्यू के क्लिप भी रीपोस्ट किए हैं, जिनमें वे एक्टिव पॉलिटिक्स छोड़ने पर विचार करने की बात कर रहे हैं। हालांकि उन्होंने साफ तौर पर यह नहीं कहा है कि उन्होंने भाजपा छोड़ने का फैसला किया है।
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दो पुराने वीडियो एक्स पर रीपोस्ट किए
शहजाद पूनावाला ने अपने दो पुराने वीडियो एक्स पर रीपोस्ट किए। एक 9 जुलाई का और दूसरा 28 जून का, जिनमें उन्होंने बताया कि राजनीतिक योगदान सिर्फ चुनावी प्रतिनिधियों के तौर पर ही नहीं दिया जाना चाहिए। एक वीडियो में उन्होंने कहा कि समाज सेवा सियासत से कहीं ज्यादा बड़ी चीज है। उसी क्लिप में उन्होंने यह भी बताया कि वह 2025 के लोकसभा चुनावों के बाद राजनीति छोड़ने के लिए तैयार थे। उन्होंने वीडियो में कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वह तीसरी बार सत्ता में लौटने के बाद काफी भावुक दिखे थे। उनके हाव-भाव देखकर और यह जानते हुए कि उस समय बंगाल, दिल्ली, महाराष्ट्र और हरियाणा जैसे कुछ अहम चुनाव होने वाले थे, मैंने बने रहने का फैसला किया। मैंने इन चुनावों को जीतकर एक संदेश देने और फिर सक्रिय राजनीति से हट जाने के लिए कड़ी मेहनत करने का फैसला किया। उन्होंने अपने अपडेटेड बायो का स्क्रीनशॉट शेयर करने के करीब दो घंटे बाद इन दोनों वीडियोज को रीशेयर किया।
कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए थे
पूनावाला विपक्ष के मुखर आलोचक रहे हैं और अक्सर टीवी न्यूज शो, राजनीतिक मंचों और बहसों में बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता के तौर पर नजर आते रहे हैं। साल 2021 में उन्हें दिल्ली में भाजपा के सोशल मीडिया विंग का इंचार्ज बनाया गया था। पेशे से वकील और एक्टिविस्ट शहजाद पूनावाला ने कांग्रेस के साथ अपना सियासी सफर शुरू किया था। वे 2017 में तब चर्चा में आए, जब उन्होंने पार्टी प्रमुख के तौर पर राहुल गांधी को आगे बढ़ाने के लिए वंशवादी राजनीति का विरोध करते हुए अपनी ही पार्टी के खिलाफ सार्वजनिक रूप से बगावत कर दी थी।



