मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव तेजी से बढ़ता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी सेना ने दावा किया है कि ईरान ने क्षेत्र में मौजूद उसके सैन्य ठिकानों पर अचानक बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया। हालांकि अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, सभी मिसाइलों को समय रहते सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट कर लिया गया और किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है।
सेंटकॉम के मुताबिक यह हमला मंगलवार शाम को हुआ, लेकिन सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए संभावित निशानों या सैन्य ठिकानों का खुलासा नहीं किया गया। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि हाल के दिनों में क्षेत्र में सुरक्षा चुनौतियां लगातार बढ़ रही थीं और सेना पहले से हाई अलर्ट पर थी।
👉 यह भी पढ़ें:
- होर्मुज स्ट्रेट से हटाई गईं सभी बारूदी सुरंगें? ट्रंप ने ईरान को दी कड़ी चेतावनी
- ट्रंप की कनाडा को बड़ी टैरिफ धमकी: कार-ट्रक और ऑटो पार्ट्स पर अब 50% शुल्क!
- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल टैंकर पर हमला! अज्ञात प्रोजेक्टाइल से इंजन रूम क्षतिग्रस्त
- होर्मुज स्ट्रेट को ‘नया अमेरिकी क्षेत्र’ बताने वाला ट्रंप का नक्शा, ईरान से फिर बढ़ा तनाव
- ईरान युद्ध खत्म करने के पक्ष में, ट्रंप का सख्त रुख—क्या शुरू होगी शांति वार्ता?
- ट्रंप का बड़ा दावा: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बताया ‘अमेरिकी क्षेत्र’, ईरान को परमाणु हथियार पर चेतावनी
अमेरिका ने इस कथित हमले के तुरंत बाद जवाबी कार्रवाई करते हुए सऊदी अरब की सेना के साथ मिलकर पूर्वी इराक में मौजूद “ईरान समर्थित आतंकवादी ठिकानों” पर संयुक्त सैन्य अभियान चलाया। अमेरिकी सेना का दावा है कि यह ऑपरेशन पिछले 72 घंटों में अमेरिकी ठिकानों पर हुए लगभग 30 ड्रोन हमलों के जवाब में किया गया, जिनके पीछे ईरान समर्थित समूहों का हाथ होने का आरोप लगाया गया है।
दूसरी ओर, ईरान ने अब तक अमेरिकी आरोपों या कथित मिसाइल हमले को लेकर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की है। ऐसे में घटनाक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थिति पर करीबी नजर रखी जा रही है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब पिछले कुछ दिनों से अमेरिका और ईरान के बीच सीधे सैन्य टकराव में कमी देखने को मिली थी। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दोनों देशों के बीच “बहुत दोस्ताना बातचीत” होने का दावा किया था और कूटनीतिक समाधान की उम्मीद जताई थी। लेकिन ताजा सैन्य घटनाओं ने एक बार फिर शांति प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ता है तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और पूरे मध्य पूर्व की सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है। दुनिया की निगाहें अब वॉशिंगटन और तेहरान की अगली रणनीति पर टिकी हैं।
आपकी राय क्या है?
क्या आपको लगता है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव बड़े क्षेत्रीय संघर्ष का रूप ले सकता है, या कूटनीतिक बातचीत से हालात फिर सामान्य हो जाएंगे? नीचे कमेंट करके अपनी राय जरूर साझा करें।



