मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव तेजी से बढ़ता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी सेना ने दावा किया है कि ईरान ने क्षेत्र में मौजूद उसके सैन्य ठिकानों पर अचानक बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया। हालांकि अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, सभी मिसाइलों को समय रहते सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट कर लिया गया और किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है।
सेंटकॉम के मुताबिक यह हमला मंगलवार शाम को हुआ, लेकिन सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए संभावित निशानों या सैन्य ठिकानों का खुलासा नहीं किया गया। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि हाल के दिनों में क्षेत्र में सुरक्षा चुनौतियां लगातार बढ़ रही थीं और सेना पहले से हाई अलर्ट पर थी।
👉 यह भी पढ़ें:
- Russia-Ukraine War: यूक्रेन के युद्ध क्षेत्र में फंसे 13 भारतीय नाविक, ड्रोन-मिसाइल हमलों के बीच MV AMIR1 से मदद की गुहार
- US-Iran Tension: डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा दावा—’ईरान से दोस्ताना बातचीत जारी’, युद्ध खत्म होने की जताई उम्मीद; तेहरान ने किया इनकार
- France Wildfire News: फ्रांस में बेकाबू जंगल की आग, बोर्दो शहर से सिर्फ 15 किमी दूर पहुंची लपटें; राष्ट्रपति मैक्रों ने बताया ‘द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सबसे भयावह संकट’
- US-Iran War: इराक में नया मोर्चा, अमेरिकी सैन्य अड्डे पर ड्रोन हमला; होर्मुज में 6,000 नाविक फंसे
- अमेरिका-सऊदी अरब की ऐतिहासिक न्यूक्लियर डील! क्या सऊदी अरब को मिल सकती है यूरेनियम संवर्धन की मंजूरी?
- Iran-Israel-US Conflict: ईरान का बड़ा दावा- बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल-ड्रोन हमले, कुवैत एयरपोर्ट पर उड़ानें प्रभावित
अमेरिका ने इस कथित हमले के तुरंत बाद जवाबी कार्रवाई करते हुए सऊदी अरब की सेना के साथ मिलकर पूर्वी इराक में मौजूद “ईरान समर्थित आतंकवादी ठिकानों” पर संयुक्त सैन्य अभियान चलाया। अमेरिकी सेना का दावा है कि यह ऑपरेशन पिछले 72 घंटों में अमेरिकी ठिकानों पर हुए लगभग 30 ड्रोन हमलों के जवाब में किया गया, जिनके पीछे ईरान समर्थित समूहों का हाथ होने का आरोप लगाया गया है।
दूसरी ओर, ईरान ने अब तक अमेरिकी आरोपों या कथित मिसाइल हमले को लेकर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की है। ऐसे में घटनाक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थिति पर करीबी नजर रखी जा रही है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब पिछले कुछ दिनों से अमेरिका और ईरान के बीच सीधे सैन्य टकराव में कमी देखने को मिली थी। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दोनों देशों के बीच “बहुत दोस्ताना बातचीत” होने का दावा किया था और कूटनीतिक समाधान की उम्मीद जताई थी। लेकिन ताजा सैन्य घटनाओं ने एक बार फिर शांति प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ता है तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और पूरे मध्य पूर्व की सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है। दुनिया की निगाहें अब वॉशिंगटन और तेहरान की अगली रणनीति पर टिकी हैं।
आपकी राय क्या है?
क्या आपको लगता है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव बड़े क्षेत्रीय संघर्ष का रूप ले सकता है, या कूटनीतिक बातचीत से हालात फिर सामान्य हो जाएंगे? नीचे कमेंट करके अपनी राय जरूर साझा करें।



