नई दिल्ली। नीट पेपर लीक को लेकर पूरे देश में आंदोलन जारी है। इसी बीच गुरुवार को इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा है कि हमें गलतियां होने का सिलसिला खत्म करना होगा। वहीं, केंद्र सरकार ने कहा कि हम कई कदम उठा रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में इस परीक्षा को आयोजित कराने वाली नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) पर सवाल खड़ा किया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि कोर्ट भारत सरकार को निर्देश दे कि एनटीए को बदला जाए या पूरी तरह नया और ज्यादा सुरक्षित सिस्टम बनाया जाए। नई संस्था ऐसी हो जो तकनीकी रूप से मजबूत, ज्यादा सुरक्षित और स्वतंत्र तरीके से काम करने वाली हो। याचिकाकर्ताओं की मांग है कि कोर्ट सीबीआई को निर्देश दे कि वो पेपर लीक को लेकर अपनी जांच के बारे में चार हफ्ते में रिपोर्ट दे।
👉 यह भी पढ़ें:
- Paper Leak पर जागी सरकार, अब बिल लाने की तैयारी, 10 साल की कैद और 1 करोड़ तक का हो सकता है जुर्माना
- NEET पेपर लीक पर सोनिया गांधी का मोदी सरकार पर बड़ा हमला, बोलीं- ‘छात्रों की आवाज दबाने के बजाय जवाबदेही तय करे सरकार’
- Raja Raghuvanshi Murder Case : सुप्रीम कोर्ट ने रद्द की सोनम रघुवंशी की जमानत, वापस जाना होगा जेल
- Paper Leak Controversy: पीएम मोदी के फास्ट ट्रैक कोर्ट के ऐलान पर CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका का पलटवार, बोले- ‘मरहम नहीं, चोट की वजह का इलाज जरूरी’
- Paper Leak पर PM मोदी का बड़ा ऐलान! दोषियों को जल्द सजा के लिए बनेंगी Fast Track Courts, बोले—‘युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं’
- Dhar Bhojshala में नहीं पढ़ी जाएगी नमाज, सुप्रीम कोर्ट ने आसपास व्यवस्था करने को कहा, ढांचा न बदलने का आदेश
अब सुप्रीम कोर्ट की रहेगी नजर
नीट यूजी पेपर लीक मामले की जांच पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि उसकी इस पर नजर रहेगी। केंद्र सरकार विस्तृत हलफनामा दाखिल करेगी। हलफनामे में भविष्य में पेपर लीक रोकने के प्रस्तावों की जानकारी होगी। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि केंद्र का हलफनामा आने के बाद स्थिति देखी जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह पूरे साल इस मामले पर नजर रखेगा और फॉलो-अप करेगा। कोर्ट ने कहा कि वह यह सुनिश्चित करेगा कि पूरी तरह से संस्थागत व्यवस्था लागू हो।
केंद्र सरकार ने कोर्ट में यह कहा
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि हम कई कदम उठा रहे हैं। राधाकृष्णन रिपोर्ट लागू होगी, लेकिन सरकार इससे कहीं बढ़ कर कदम उठाएगी। हम कोर्ट को विस्तृत जानकारी देंगे। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ठीक है। हम चाहते हैं कि व्यवस्था चाक-चौबंद हो। आप जवाब दाखिल करें, 3 अगस्त को सुनवाई होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने कहा कि हलफनामे में यह बताया जाना चाहिए कि सुधारों को स्थायी व्यवस्था के रूप में लागू करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। केवल अस्थायी उपायों पर निर्भर नहीं रहा जा सकता।कोर्ट ने प्रस्तावित संचालन बोर्ड, विशेषज्ञों की अगुवाई वाली इकाइयों, संबंधित पक्षों के नामांकन और उच्च स्तरीय समिति की 10 क्षेत्रों में दी गई सिफारिशों को लागू करने की जानकारी मांगी है। इन क्षेत्रों में डिजिटल ढांचा, सुरक्षा, शोध और विकास, पारदर्शिता, प्रशासन और मानव संसाधन जैसे विषय शामिल हैं।
हर चरण के सुधारों की स्थिति की रिपोर्ट मांगी
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से यह भी बताने को कहा कि सुरक्षा, निगरानी और सतर्कता के लिए नियुक्त किए गए नए अतिरिक्त महानिदेशकों की क्या भूमिका है और इस दिशा में अब तक कितनी प्रगति हुई है। कोर्ट ने परीक्षा प्रक्रिया के हर चरण में किए जा रहे सुधारों की स्थिति रिपोर्ट भी मांगी है। इसमें परीक्षा से पहले, परीक्षा के दौरान और परीक्षा के बाद की व्यवस्था शामिल है। कोर्ट ने केंद्र से पूछा कि राज्य और जिला अधिकारियों के साथ परीक्षा प्रणाली में सुधार, कई चरणों में परीक्षा कराने की व्यवस्था, परीक्षा केंद्रों, प्रश्न पत्रों की तैयारी, छपाई और उन्हें पहुंचाने की प्रक्रिया में कितनी प्रगति हुई है।



