इंदौर। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह का एक बयान चर्चा में है। उन्होंने इंदौर एयरपोर्ट पर सीएम डॉ.मोहन यादव से थोड़ी देर चर्चा की। इसके बाद जब बाहर निकले तो सावन सोनकर से कहा कि इस बार सांवेर से चुनाव लड़ने के लिए तैयार रहो।
दिग्विजय सिंह के इस बयान के राजनीतिक हलकों में कई अर्थ लगाए जा रहे हैं। पहला तो यह कि दिग्वजिय सिंह ने इसके माध्यम से मंत्री तुलसी सिलावट पर निशाना साधा। दूसरा यह कि दिग्विजय सिंह ने यह इशारा कर दिया है कि 70 पार वाले नेता अब सावधान हो जाएं, इस बार उनके टिकट कटने तय हैं।
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नरोत्तम मिश्रा के टिकट कटने के बाद उठे सवाल
हाल ही में दतिया उपचुनाव में प्रदेश के गृह मंत्री और खुद को सीएम मटेरियल समझने वाले भाजपा के वरिष्ठ नेता नरोत्तम मिश्रा का टिकट काट दिया गया। वे सीएम से लेकर प्रदेश अध्यक्ष तक आंसू बहाते रहे, लेकिन हुआ कुछ नहीं। इतना ही नहीं उन्होंने दिल्ली तक दौड़ भी लगाई, लेकिन किसी वरिष्ठ नेता ने उन्हें भाव नहीं दिया। इसका गम भाजपा प्रत्याशी के नामांकन के दिन उनकी आंखों से आंसू बनकर बहा।
नितिन नवीन के आने के बाद सबकुछ साफ
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए कई वरिष्ठ नेताओं के नाम चल रहे थे। इनमें से मनोहरलाल खट्टर जैसे कई तो नरेंद्र मोदी के काफी करीबी थे, लेकिन सबको दरकिनार कर युवा नितिन नवीन को यह जिम्मेदारी सौंपी गई। इसके बाद से ही यह तय हो गया था कि भाजपा अब अपना चेहरा बदलना चाहती है। जाहिर है संगठन से लेकर सरकार तक इसका असर पड़ने वाला है।
मान ही नहीं रहे एमपी के बुजुर्ग नेता
राष्ट्रीय नेतृत्व के इशारे के बाद भी मध्यप्रदेश के बुजुर्ग नेता अभी भी कुर्सी छोड़ने को तैयार नहीं हैं। कैबिनेट में बड़े पद पर बैठे नेता भी राज्यसभा के माध्यम से दिल्ली जाने की कोशिशों में जुटे रहे, लेकिन संगठन ने उन्हें भाव नहीं दिया। कई तो अब भी अगला विधानसभा चुनाव लड़ने क तैयारी में लग गए हैं। जबकि, पार्टी ने नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर साफ संदेश दे दिया है कि अब पुराने नेताओं को तवज्जो नहीं मिलने वाली।
इंदौर के कई नेताओं पर खतरा
इंदौर के दो मंत्री तुलसी सिलावट और कैलाश विजयवर्गीय, विधायक महेंद्र हार्डिया व मधु वर्मा भी इसी श्रेणी के नेताओं में आते हैं। तुलसी भिया की तो किश्मत इतनी अच्छी है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया के माध्यम से हर बार टिकट भी पा जाते हैं और मंत्री की कुर्सी भी मिल जाती है। उनके लिए सांवेर का मैदान भी साफ कर दिया जाता है। कैलाश विजयर्गीय खुद ही मंच से बोल चुके हैं कि वे सठिया गए हैं। हालांकि वे अपने दिल्ली के संबंधों के मुगालते में आगे भी बैटिंग करते रहने की कोशिश कर रहे हैं।
सांवेर के मैदान में इस बार कांटे
राजनीति के जानकार कह रहे हैं कि भाजपा संगठन के नए मापदंडों को देखते हुए इस बार तुलसी सिलावट के लिए सांवेर में कांटे उग आए हैं। सोनकर परिवार भी वहां वर्षों पुराना अपना दबदबा फिर से वापस लेने की कोशिशों में जुटा है। कांग्रेस से तुलसी सिलावट के भाजपा में आने के बाद सांवेर के भाजपा कार्यकर्ताओं की हालत किसी से छिपी नहीं है। हो सकता है, इस बार भाजपा तुलसी पहलवान को इस बार बाहर बिठा दे और ज्योतिरादित्य सिंधिया को किसी अन्य विधानसभा क्षेत्र में उनके समर्थक को टिकट देने पर राजी कर ले।
सावन सोनकर लगातार हैं सक्रिय
म.प्र. राज्य सहकारी अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष सावन सोनकर सांवेर ही नहीं पूरे जिले में लगातार सक्रिय हैं। सीएम से लेकर अधिकांश नेताओं तक उन्होंने अच्छी पहचान बना रखी है। ऐसे में अगर भाजपा के नए फॉर्मूले पर टिकट वितरण होता है तो जाहिर है कि सांवेर से सावन सोनकर का ही नाम आएगा। ऐसे में दिग्विजय सिंह की बात में दम दिख रहा है।



