अमेरिका ने अपने करीब 60 प्रमुख ट्रेड पार्टनर देशों से आने वाले सामान पर नया टैरिफ लगाने का फैसला किया है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इन देशों की ओर से जबरन मजदूरी (Forced Labour) को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। प्रस्तावित नए टैरिफ की दर 10 से 12.5 फीसदी तक बताई जा रही है। इस फैसले का असर भारत समेत ब्रिटेन, चीन, यूरोपीय संघ, कनाडा और जापान जैसे प्रमुख व्यापारिक साझेदारों पर भी पड़ने की बात कही गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, नया टैरिफ शुक्रवार से लागू होगा। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब विदेशी सामान पर लगाया गया 10 फीसदी का अस्थायी टैरिफ समाप्त होने वाला है। अमेरिका के इस कदम को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में जारी ट्रेड वॉर की दिशा में एक और बड़ा कदम माना जा रहा है।
👉 यह भी पढ़ें:
- Canada Wildfire News: डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा आरोप, ‘कनाडा की जंगलों में लापरवाही से अमेरिका में जहरीली हवा’, नए Tariff की चेतावनी
- Trump Tariff Shock: डोनाल्ड ट्रंप ने ब्राजील पर लगाया 25% टैरिफ, Global Trade War तेज! Lula ने दी WTO जाने की चेतावनी
- US Tariff Shock: क्या भारत पर फिर गिरेगा Trump Tariff Bomb? अमेरिका के नए प्रस्ताव से बढ़ी व्यापार युद्ध की आशंका
- रूसी राजनयिक का बयान: अमेरिकी टैरिफ चुनौतियों से निपटने की रणनीति तैयार
भारत समेत बड़े ट्रेड पार्टनर पर असर की आशंका
अमेरिका के नए टैरिफ प्रस्ताव में भारत समेत दुनिया की कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को शामिल किए जाने की बात सामने आई है। इनमें ब्रिटेन, चीन, यूरोपीय यूनियन, कनाडा और जापान जैसे प्रमुख ट्रेड पार्टनर भी शामिल हैं।
टैरिफ बढ़ने का सीधा असर दोनों देशों के बीच होने वाले व्यापार पर पड़ सकता है। अमेरिकी बाजार में भारतीय और अन्य देशों के उत्पाद महंगे हो सकते हैं, जबकि निर्यातकों पर लागत का दबाव बढ़ने की आशंका है।
भारत के लिए यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिका उसके प्रमुख निर्यात बाजारों में से एक है। यदि भारतीय उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क लागू होता है तो कपड़ा, इंजीनियरिंग उत्पाद, ऑटो पार्ट्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य निर्यात क्षेत्रों पर इसका प्रभाव पड़ सकता है।
हालांकि, वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि नया टैरिफ किन उत्पादों और श्रेणियों पर लागू होता है तथा भारत सरकार और प्रभावित उद्योग इस स्थिति से निपटने के लिए क्या रणनीति अपनाते हैं।
जबरन मजदूरी रोकने में नाकामी का अमेरिका ने लगाया आरोप
अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि जिन देशों पर यह टैरिफ लागू किया जाएगा, वे अपने यहां जबरन मजदूरी की प्रथा को रोकने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं कर रहे हैं।
अमेरिका की व्यापार नीति में जबरन मजदूरी और मानवाधिकारों से जुड़े मुद्दे लंबे समय से महत्वपूर्ण रहे हैं। अमेरिकी प्रशासन का तर्क है कि वैश्विक सप्लाई चेन में ऐसे उत्पादों को रोकना जरूरी है, जिनके निर्माण में जबरन मजदूरी का इस्तेमाल किया जाता है।
इसी नीति के तहत अब अमेरिका ने कई व्यापारिक साझेदार देशों से आने वाले सामान पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की तैयारी की है।
ट्रेड वॉर के बीच ट्रंप का एक और बड़ा कदम
डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद अमेरिका की व्यापार नीति में बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। आयात शुल्क और टैरिफ को लेकर अमेरिका और उसके प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के बीच तनाव बढ़ा है।
अमेरिका का नया फैसला ऐसे समय में आया है जब वैश्विक व्यापार पहले से ही कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। विशेषज्ञों की नजर इस बात पर है कि नए टैरिफ के बाद प्रभावित देश अमेरिका के खिलाफ जवाबी कार्रवाई करते हैं या फिर बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश करते हैं।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बदली रणनीति
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को अपनी टैरिफ नीति लागू करने के लिए वैकल्पिक कानूनी रास्तों की तलाश करनी पड़ी। इसके बाद व्हाइट हाउस की ओर से अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत नए टैरिफ लगाने की दिशा में कदम बढ़ाए गए।
पिछले महीने व्हाइट हाउस ने पहली बार यह प्रस्ताव रखा था कि जिन देशों पर जबरन मजदूरी रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाने का आरोप है, वहां से अमेरिका आने वाले सामान पर 10 से 12.5 फीसदी तक टैरिफ लगाया जा सकता है।
अब नए टैरिफ के लागू होने से वैश्विक व्यापार और अमेरिका के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के साथ उसके संबंधों पर असर पड़ने की आशंका है। भारत समेत प्रभावित देशों के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वे अपने निर्यातकों को संभावित नुकसान से कैसे बचाते हैं।
आपको क्या लगता है—क्या नया टैरिफ वैश्विक ट्रेड वॉर को और बढ़ाएगा या इससे अमेरिका और उसके व्यापारिक साझेदारों के बीच नई व्यापारिक डील का रास्ता खुलेगा? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।



