नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र का आज तीसरा दिन भी विपक्ष के हंगामे की भेंट चढ़ता नजर आया। पिछले दो दिनों की तरह बुधवार को भी लोकसभा और राज्यसभा में विपक्षी सांसदों ने विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की मांग को लेकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। हंगामे के कारण दोनों सदनों की कार्यवाही को दोपहर 12 बजे तक स्थगित करना पड़ा।
विपक्ष लगातार NEET मुद्दे, छात्रों पर पुलिस कार्रवाई, कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के विरोध प्रदर्शन और अयोध्या में राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी जैसे मुद्दों पर तत्काल चर्चा की मांग कर रहा है।
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लोकसभा में हंगामे के बीच कार्यवाही स्थगित
लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने अपने नोटिस में दिए गए मुद्दों पर चर्चा कराने की मांग को लेकर नारेबाजी शुरू कर दी। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सांसदों से सदन में व्यवस्था बनाए रखने और प्रश्नकाल चलने देने की अपील की।
ओम बिरला ने कहा कि विपक्ष द्वारा उठाए गए मुद्दों पर चर्चा के लिए सदन तैयार है, लेकिन निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्रश्नकाल के बाद इन विषयों पर चर्चा की जा सकती है।
अध्यक्ष की अपील के बावजूद विपक्षी सांसदों का विरोध जारी रहा। इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी।
सुप्रीम कोर्ट जजों की संख्या से जुड़े विधेयक पर होगी चर्चा
हंगामे के बीच लोकसभा के बुधवार के विधायी एजेंडे में सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 भी शामिल है। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल इस विधेयक को चर्चा और पारित कराने के लिए सदन में पेश करेंगे।
यह विधेयक 20 जुलाई को लोकसभा में पेश किया गया था। प्रस्तावित कानून का उद्देश्य सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) अधिनियम, 1956 में आगे संशोधन करना है।
कार्यसूची के मुताबिक, केंद्रीय कानून मंत्री विधेयक पर विचार करने का प्रस्ताव रखेंगे और इसके बाद इसे पारित कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
अध्यादेश को अस्वीकार करने की मांग
विधायी कामकाज के साथ ही सांसद सौगत राय, एनके प्रेमचंद्रन और डीन कुरीयाकोस की ओर से लाए गए वैधानिक प्रस्ताव पर भी चर्चा प्रस्तावित है।
इस प्रस्ताव में राष्ट्रपति की ओर से 16 मई को जारी सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) संशोधन अध्यादेश, 2026 को अस्वीकार करने की मांग की गई है।
राज्यसभा में भी विपक्ष का हंगामा
राज्यसभा की कार्यवाही सभापति सीपी राधाकृष्णन की अध्यक्षता में शुरू हुई। सदन की शुरुआत में दिवंगत सदस्यों और अन्य लोगों के लिए शोक संदेश पढ़े गए।
इसके बाद विपक्षी सांसदों ने अपनी मांगों को लेकर चर्चा शुरू कराने की कोशिश की। सभापति ने सांसदों से अपनी बारी का इंतजार करने की अपील की।
सदन के पटल पर आवश्यक दस्तावेज रखे जाने के बाद विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने छात्रों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई और कथित लाठीचार्ज का मुद्दा उठाया। इसके बाद हंगामा बढ़ने पर राज्यसभा की कार्यवाही भी दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी गई।
संसद में गतिरोध कब होगा खत्म?
मानसून सत्र की शुरुआत से ही विपक्ष और सरकार के बीच विभिन्न मुद्दों को लेकर टकराव देखने को मिल रहा है। विपक्ष का कहना है कि छात्रों और NEET से जुड़े मुद्दों समेत अन्य महत्वपूर्ण मामलों पर सदन में तत्काल चर्चा होनी चाहिए। वहीं, सरकार की ओर से सदन की निर्धारित प्रक्रिया के तहत चर्चा कराने की बात कही जा रही है।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकार और विपक्ष के बीच सहमति बन पाएगी या मानसून सत्र के अगले दिनों में भी संसद की कार्यवाही हंगामे की भेंट चढ़ती रहेगी।
अब सवाल आपसे…
क्या संसद में विपक्ष द्वारा छात्रों और NEET जैसे मुद्दों पर तत्काल चर्चा की मांग उचित है, या सदन की कार्यवाही तय नियमों और प्रक्रिया के अनुसार ही चलनी चाहिए?
आपके मुताबिक संसद में जारी इस गतिरोध का समाधान कैसे निकाला जा सकता है? क्या सरकार और विपक्ष को इन मुद्दों पर सर्वदलीय चर्चा करनी चाहिए? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।



