नई दिल्ली। अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को नोटिस जारी किया है। इसके अलावा एसआईटी से मामले की जांच की रिपोर्ट भी मांगी है। अब अगली सुनवाई अगले सोमवार को होगी।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच ने की। बेंच ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित एसआईटी की जांच की स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। कोर्ट ने कहा कि हम उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित एसआईटी को स्टेटस रिपोर्ट सौंपने का निर्देश देते हैं।
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सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल
श्रीराम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित किए गए चढ़ावे, दान-पात्रों की राशि और कीमती वस्तुओं में हेराफेरी के आरोप लगाए गए हैं। इस कथित चोरी की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में कई जनहित याचिकाएं दायर की गई हैं। इन्हीं जनहित याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने श्रीराम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को नोटिस जारी किया है। ये याचिकाएं राजद सांसद सुधाकर सिंह, अधिवक्ता नरेंद्र कुमार गोस्वामी और वकील अजय कुमार राय व दिनेश कुमार यादव और हिन्दू धर्म परिषद ने दायर की हैं।
याचिकाकर्ताओं की क्या है मांग
इन याचिकाकर्ताओं का मुख्य तर्क है कि मंदिर करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र है, इसलिए चढ़ावे के प्रबंधन में पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए। उन्होंने इस पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सके।
जांच की स्टेटस रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में मांगा
केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पीठ के समक्ष पेश हुए। पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि स्टेटस रिपोर्ट एक सीलबंद लिफाफे में देने का निर्देश दिया है। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने राम मंदिर ट्रस्ट को नोटिस टालने की अपील की, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। सुनवाई के दौरान एक याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि मामले से जुड़े सीसीटीवी फुटेज और अन्य रिकॉर्ड को भी संरक्षित करने की जरूरत थी। साथ ही याचिकाकर्ताओं ने मांग की कि उन्हें भी जांच की स्टेटस रिपोर्ट मुहैया कराई जाए। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की इस मांग को खारिज कर दिया और कहा कि ‘हम इस बारे में बाद में देखेंगे क्योंकि अभी जांच जारी है।
तुरंत सुनवाई से कर दिया था इनकार
इससे पहले जब जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और शील नागू की पीठ के सामने गोस्वामी की याचिका का जिक्र किया गया था, तो सुप्रीम कोर्ट ने उस पर तुरंत सुनवाई करने से इंकार कर दिया था। याचिकाकर्ता ने मामले को तुरंत लिस्ट करने पर जोर दिया था और कहा था कि लगाए गए आरोप बहुत गंभीर हैं। मामले की तात्कालिकता पर सवाल उठाते हुए न्यायमूर्ति सुंदरेश की अध्यक्षता वाली पीठ ने निर्देश दिया था कि ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद शीर्ष अदालत के फिर से खुलने पर इस मामले को सूचीबद्ध किया जाए।



