नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने एक बार फिर घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतें बढ़ा दी है। जब विपक्ष ने हो-हल्ला मचाया और सोशल मीडिया पर लोग सरकार की आलोचना करने लगे तो सरकार ने अब सफाई दी है। सरकार ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतों में तेज उछाल के बावजूद भारत में परिवारों को रसोई गैस दुनिया के अन्य देशों की तुलना में सस्ती कीमत पर मिल रही है।
अब तक 89 रुपये की बढ़ोतरी
एलपीजी सिलेंडरों की कीमत में अब तक 89 रुपए की वृद्धि की जा चुकी है। इससे पहले सात मार्च को घरेलू रसोई गैस के दाम 60 रुपये प्रति सिलेंडर बढ़ाए गए थे। इस तरह से 14.2 किलोग्राम के रसोई गैस सिलेंडर के दाम कुल मिलाकर 89 रुपये बढ़ चुके हैं।
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1600 रुपए से अधिक का पड़ता है एक सिलेंडर
बताया जा रहा है कि सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों को प्रत्येक सिलेंडर की बिक्री पर 703 रुपये का नुकसान हो रहा था। सरकार ने बताया कि पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति बाधित होने के कारण एलपीजी का वैश्विक बेंचमार्क ‘सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस’ फरवरी के बाद लगभग 46 प्रतिशत बढ़ गया है। इसके चलते घरेलू एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति की वास्तविक लागत 1,600 रुपये से अधिक हो चुकी है।
करीब 60 हजार करोड़ का नुकसान
सरकार का कहना है कि घरेलू उपभोक्ता केवल 942 का भुगतान कर रहे हैं, जबकि शेष लागत का बड़ा हिस्सा सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियां और सरकार वहन कर रही हैं। सरकार के मुताबिक, घरेलू एलपीजी पर नुकसान पिछले वित्त वर्ष में बढ़कर लगभग₹60,000 करोड़ हो गया, जो एक वर्ष पहले 41,338 करोड़ थी। इस नुकसान की आंशिक भरपाई के लिए केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम कंपनियों को ₹30,000 करोड़ की क्षतिपूर्ति देने को मंजूरी दी है।
पाकिस्तान, नेपाल और अमेरिका से कम दाम
सरकार ने यह भी कहा कि संकट के दौरान देश में एलपीजी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए घरेलू उत्पादन में 60 प्रतिशत से अधिक वृद्धि की गई है। अमेरिका, कनाडा तथा अल्जीरिया जैसे देशों से अतिरिक्त आयात की व्यवस्था की गई। सरकार का दावा है कि भारत में घरेलू एलपीजी की कीमतें पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका समेत कई देशों और अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया तथा कनाडा जैसे विकसित देशों की तुलना में अब भी कम हैं।


