तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 में एक ऐसी कहानी सामने आई है जिसने राजनीति की पारंपरिक तस्वीर को पूरी तरह बदलकर रख दिया है। एक साधारण ऑटो चालक से नेता बने के. विजय धामू ने रॉयापुरम सीट से शानदार जीत दर्ज कर न केवल दिग्गज नेताओं को चौंका दिया, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि अब राजनीति में आम आदमी की ताकत तेजी से उभर रही है।
इस चुनाव में विजय धामू ने तमिलगा वेत्री कझगम के टिकट पर मैदान में उतरकर 55 हजार से अधिक वोट हासिल किए और लगभग 14 हजार वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की। उनकी इस जीत ने उस सीट पर वर्षों से कायम मजबूत राजनीतिक पकड़ को हिला कर रख दिया, जिसे कभी अभेद माना जाता था।
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सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इस मुकाबले में अनुभवी नेता डी. जयकुमार तीसरे स्थान पर चले गए, जो अपने आप में एक बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। वहीं सुबैर खान दूसरे स्थान पर रहे, लेकिन वे भी धामू की लोकप्रियता और लहर को रोक नहीं सके। इससे साफ संकेत मिलता है कि जनता अब पारंपरिक चेहरों से हटकर नए और जमीनी नेताओं को मौका देने के मूड में है।
विजय धामू की सफलता के पीछे उनकी सादगी और आम आदमी की छवि सबसे बड़ा कारण मानी जा रही है। वे लंबे समय तक अभिनेता विजय के संगठन “विजय मक्कल इयक्कम” से जुड़े रहे और जमीनी स्तर पर लोगों के बीच सक्रिय रहे। यही वजह है कि उनकी पहचान एक ऐसे नेता के रूप में बनी, जो लोगों की समस्याओं को समझता है और उनके बीच रहता है।
रॉयापुरम क्षेत्र में बड़ी संख्या में मछुआरे और मजदूर वर्ग के लोग रहते हैं। धामू ने अपने चुनाव अभियान में बंदरगाह के विकास, मछुआरों के लिए बेहतर योजनाएं और सामाजिक सुरक्षा जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। ये सभी मुद्दे सीधे जनता की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े थे, इसलिए लोगों ने उन पर भरोसा जताया।
विजय धामू की यह जीत सिर्फ एक सीट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह तमिलनाडु की बदलती राजनीतिक सोच का प्रतीक बन गई है। जहां पहले कुछ चुनिंदा दलों का दबदबा था, अब वहां नए विकल्प तेजी से उभर रहे हैं। इस बदलाव का सबसे बड़ा चेहरा बनकर उभरे हैं विजय धामू, जिनकी कहानी आने वाले समय में राजनीति के लिए नई प्रेरणा बन सकती है।



