अमेरिका के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि फारस की खाड़ी में उसकी नाकेबंदी और सैन्य कार्रवाई से ईरान को तेल राजस्व में भारी नुकसान हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, इस कार्रवाई के चलते ईरान को लगभग 4.8 अरब डॉलर (करीब पांच अरब डॉलर) का नुकसान झेलना पड़ा है।
बताया गया है कि समुद्र में अमेरिका की सक्रिय कार्रवाई के कारण ईरान का व्यापार और ऊर्जा निर्यात गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास पहले से ही तनाव बना हुआ है, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में गिना जाता है।
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पेंटागन के मुताबिक यह कार्रवाई ईरान पर लगातार आर्थिक दबाव बनाए रखने के उद्देश्य से की जा रही है। इस बीच, स्कॉट बेसेंट ने ईरानी नेतृत्व पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि तेहरान की सरकार वास्तविक स्थिति से अनजान है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़ चुकी है। उन्होंने दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिका का पूरा नियंत्रण है और जब तक समुद्री आवाजाही की स्वतंत्रता बहाल नहीं होती, तब तक नाकेबंदी जारी रहेगी।
बेसेंट ने यह भी कहा कि ईरान की आर्थिक स्थिति खराब होती जा रही है, गौरतलब है कि इस्लामाबाद में वार्ता विफल होने के बाद 13 अप्रैल को अमेरिका ने ईरान के खिलाफ नौसैनिक नाकेबंदी शुरू की थी, जिसके बाद से दोनों देशों के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है।


