इंदौर। इंदौर के भूमाफिया फर्जीवाड़े के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाते रहते हैं। इसमें फर्जी एनओसी का मामला प्रमुख है। हाल ही में इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) में एक ऐसा ही प्रकरण सामने आया है, जिसमें आईडीए के अधिकारियों की फर्जी साइन से एनओसी लेने की कोशिश की गई थी। इस संबंध में आईडीए ने पुलिस में लिखित शिकायत की है, जिसमें विधि विभाग के एक कर्मचारी पर शंका जाहिर की गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार यह मामला 97 पार्ट 4 बिजलपुर की जमीन का है। यह जमीन आईडीए की योजना में शामिल है। हाल ही में जमीन मालिक की ओर से टीएनसीपी में ले-आउट स्वीकृति के लिए आवेदन लगाया गया था। जांच में पता चला कि आईडीए से जारी की गई एनओसी और प्रारूप में साइन का अंतर है। यह एनओसी प्लानिंग और भू-अर्जन दोनों विभागों से जारी हुई थी। टीएनसीपी अधिकारियों को शक हुआ तो उन्होंने आईडीए अधिकारियों को फोन किया। तब पता चला कि यहां से इस तरह की कोई एनओसी जारी नहीं की गई है।
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आईडीए ने तुकोगंज थाने को लिखा पत्र
इसके बाद आईडीए के भूअर्जन अधिकारी सुदीप मीणा और मुख्य नगर नियोजक ने थाना तुकोगंज को कार्रवाई के लिए 27 अप्रैल 2026 को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की है। इस संबंध में भू-अर्जन अधिकारी सुदीप मीणा का कहना है कि नकली साइन कर फर्जी एनओसी बनाने का मामला हमारे सामने आया है। मेरे भी नकली साइन बनाकर फर्जी एनओसी बनाई गई है। पुलिस को आवेदन देकर कार्रवाई के लिए कहा है।
एडिशनल डीसीपी ने कहा-जांच कर होगी कार्रवाई
एडिशनल डीसीपी राम सनेही मिश्रा ने कहा कि आईडीए के भूअर्जन अधिकारी का पत्र मिला है। खातीलावाल टैंक के किसी जगजीत सिंह ने प्लॉट की अनुमतियां कूचरचित दस्तावेज से ली हैं। आवेदन को अवलोकन में ले लिया गया है। सारे तथ्य जुटाए जाएंगे। आईडीए से संबंधित दस्तावेज मांगे गए हैं। दस्तावेजों के परीक्षण के बाद कार्रवाई की जाएगी।
आईडीए ने तथ्यों सहित की शिकायत
आईडीए ने पुलिस को लिखी शिकायत में कहा है कि आवेदक जगजीत सिंह, खातीवाला टैंक ने ग्राम बिजलपुर, तहसील राउ व जिला इन्दौर की भूमि सर्वे क्रमांक 3/2 कुल रकबा 0.526 हैक्टर भूमि पर आवासीय प्लॉट के उपयोग हेतु अभिन्यास अनुमोदन के लिए म.प्र. नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम 1973 की धारा 29 (1) के तहत ऑनलाइन आवेदन 2 दिसंबर 25 को प्रस्तुत किया गया था। आवेदन के साथ आईडीए के भू-अर्जन अधिकारी के 30 सितंबर 25 का पत्र संलग्न किया गया। इसके साथ ही आईडीए के मुख्य नगर नियोजक एक पत्र भी प्रस्तुत किया गया है।
आईडीए ने कहा-सभी पत्र फर्जी
आईडीए ने पुलिस को लिखा है कि आवेदक द्वारा प्रस्तुत सभी पत्रों को प्रथमदृष्टया फर्जी / कूटरचित दस्तावेज होने का संदेह होना प्रतीत होता है। आईडीए ने कहा है कि जब विभाग में जांच की गई तो पता चला कि ऐसा कोई पत्र जारी नहीं हुआ है। इस पर भू-अर्जन अधिकारी के हस्ताक्षर कूटरचित होकर फर्जी है। मुख्य नगर नियोजक के हस्ताक्षर भी कूटरचित होकर फर्जी हैं।
विधि विभाग के कर्मचारी श्रीवास्तव पर शक
आईडीए ने पुलिस को लिखा है कि प्रकरण के संबंध में जानकारी प्राप्त करने पर यह ज्ञात हुआ है कि विधि शाखा में पदस्थ कर्मचारी शिवम श्रीवास्तव बगैर आवेदन एवं बिना अनुमति के कई दिनों से अनुपस्थित है। उसका मोबाईल भी बंद है। साथ ही वॉट्सएप पर एक वीडियो आया है, जिसे देखने पर यह प्रतीत हो रहा है कि उक्त कृत्य में वह सम्मिलित है । इस प्रकरण में इनके साथ अन्य बाहरी व्यक्तियों की संलिप्तता भी परिलक्षित हो रही है। इस प्रकरण में जांच करवाते हुए फर्जी हस्ताक्षर कर कूटरचित दस्तावेज करने वाले के विरुद्ध विधि अनुसार अतिशीघ्र कार्यवाही की जाए।


