इंदौर। मध्यप्रदेश में निगम-मंडल-प्राधिकरण-प्रकोष्ठ-आयोग में लगातार नियुक्तियां हो रही हैं, लेकिन इंदौर में कुछ अलग ही खेल चल रहा है। इस खेल के कारण इंदौर विकास प्राधिकरण में नियुक्ति नहीं हो पा रही है। मंत्रीगुट और भाजपा के अन्य नेताओं के बीच लड़ाई के कारण नाम पर फैसला नहीं हो पा रहा। अब भाजपा के ही कुछ नेता और गुट मंत्रीजी की प्लानिंग को ध्वस्त करने में लगे हैं।
सोशल मीडिया पर चल रहा ऐसा मैसेज
भारतीय जनता पार्टी मध्यप्रदेश की मजबूरी
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इंदौर की विडंबना देखिए
मध्यप्रदेश शासन के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के व्यक्तियों को जवाबदारी व महत्व दिया जा रहा है
कैलाश विजयवर्गीय गुट का
1.महापौर पुष्यमित्र भार्गव
2. भाजपा जिला श्रवणसिंह चावड़ा
3. भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा
4. नगर निगम का सभापति मुन्नालाल यादव
5.निगम जनकार्य विभाग प्रभारी राजेंद्र राठौर
6. कैबिनेट मंत्री व विधानसभा क्षेत्र क्र.1 में विधायक कैलाश विजयवर्गीय
7. इंदौर क्षेत्र क्र. 2 विधायक रमेश मेंदोला
8.इंदौर क्षेत्र क्र. 3 विधायक गोलू शुक्ला
उपरोक्त सभी एक ग्रुप के
अब क्या इंदौर विकास प्राधिकरण का अध्यक्ष भी कैलाश विजयवर्गीय गुट का होगा?
इस बार हरिनारायण यादव के लिए अड़े
उल्लेखनीय है कि मंत्रीजी शुरू से ही अपने खास समर्थक हरिनारायण यादव को आईडीए अध्यक्ष बनवाने की इच्छा रखते हैं। इसके लिए लगातार कोशिश भी जारी है और कई तरह की रणनीति भी बनाई जाती रही है। इस बार मंत्रीजी अध्यक्ष के लिए यादव के नाम पर अड़े हुए हैं। मंत्रीजी ने यादव सहित अपने अन्य समर्थकों के सपोर्ट के लिए महापौर पुष्यमित्र भार्गव, विधायक रमेश मेंदोला, गोलू शुक्ला और नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा की टीम बना ली है।
अध्यक्ष ही नहीं, उपाध्यक्ष और संचालक भी चाहिए
इस बार मंत्रीजी को अध्यक्ष ही नहीं दोनों उपाध्यक्ष और संचालक भी चाहिए। उपाध्यक्ष के लिए मंत्रीजी ने कांग्रेस से भाजपा में लाए गए अपने नए चेले अक्षय कांति बम का नाम तय किया है। वहीं दूसरे उपाध्यक्ष पर टीनू जैन की नियुक्ति चाहते हैं। इसके साथ ही संचालक के एक पद पर मंत्रीजी अपने खास समर्थक चिंटू वर्मा को देखना चाहते हैं।
भाजपा के दूसरे नेता करने लगे हैं विरोध
मंत्रीजी की योजना का पता चलते ही इंदौर के बाकी नेताओं को गुटों में हड़कंप मच गया। इसीलिए संगठन तक शिकायत पहुंचाने के साथ ही अब सार्वजनिक रूप से सोशल मीडिया पर विरोध शुरू हो गया है। सोशल मीडिया पर यह सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या इंदौर में सभी पद सिर्फ एक ही गुट यानी मंत्री गुट को ही दिए जाएंगे। अब देखना यह है कि इस खेल में आखिर जीत किसकी होती है।


