नोएडा पुलिस ने एक बड़े षड्यंत्र का खुलासा किया है, जिसमें हाल ही में हुए श्रमिक आंदोलन के दौरान भड़की हिंसा के मामले में उपद्रवी तत्वों द्वारा युवाओं, खासकर नई पीढ़ी को देशविरोधी गतिविधियों के लिए तैयार करने की कोशिश की जा रही थी। जांच के दौरान मिली एक डायरी ने इस पूरे नेटवर्क की परतें खोल दी हैं।
पुलिस के अनुसार, यह डायरी हिमांशु नामक आरोपी से जुड़ी बताई जा रही है, जिसमें ऐसे संकेत मिले हैं कि कुछ संगठित समूह योजनाबद्ध तरीके से युवाओं को चिन्हित कर उनका ब्रेनवॉश कर रहे थे। इन युवाओं को भविष्य में “स्लीपर सेल” की तरह इस्तेमाल करने की योजना थी।
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जांच में सामने आया है कि एक टीम देशभर, विशेषकर एनसीआर क्षेत्र में, ऐसे युवाओं की पहचान कर रही थी जो सरकार की नीतियों के विरोधी विचार रखते हैं। वहीं दूसरी टीम उनसे संपर्क कर उन्हें अपने प्रभाव में लेने और संगठन से जोड़ने का काम कर रही थी।
सूत्रों के मुताबिक, डायरी में 18 से 20 ऐसे युवाओं के नाम दर्ज हैं, जो इंटरनेट मीडिया और शैक्षणिक परिसरों में सरकार विरोधी विचार व्यक्त करते रहे हैं। इनसे संपर्क कर उन्हें धीरे-धीरे प्रभावित किया जा रहा था और संगठन की विचारधारा से जोड़ा जा रहा था।
जांच एजेंसियों का मानना है कि यह पूरा तंत्र पड़ोसी देशों—जैसे बांग्लादेश और नेपाल—की तर्ज पर युवाओं की एक संगठित टोली तैयार करने की साजिश की ओर इशारा करता है, जिससे भविष्य में बड़े स्तर पर अशांति फैलाई जा सके।
जांच में सामने आए आरोपियों की पृष्ठभूमि भी विविध है। कोई खुद को ऑटो चालक बताता है तो कोई इंजीनियर है, कोई फैक्ट्री में काम करता है तो कोई कला और शोध के क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। कुछ आरोपी उच्च शिक्षा प्राप्त हैं और शोध कार्य में भी लगे हुए हैं।
यह खुलासा इस बात की ओर संकेत करता है कि आधुनिक तकनीक और इंटरनेट के माध्यम से युवाओं को प्रभावित कर संगठित गतिविधियों में शामिल करने की कोशिशें किस तरह की जा रही हैं। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही हैं और हर पहलू पर नजर बनाए हुए हैं।



