ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बागर गालिबाफ ने अमेरिका पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि बातचीत शुरू होने से पहले ही युद्धविराम से जुड़ी तीन अहम शर्तों का उल्लंघन हो चुका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका पर भरोसा न करने की वजह उसका बार-बार वादे तोड़ने का इतिहास है, और इस बार भी वही दोहराया गया है।
गालिबाफ ने अपने बयान में कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान के 10 बिंदुओं वाले प्रस्ताव को बातचीत का आधार माना था, लेकिन इसके बावजूद अब तक तीन महत्वपूर्ण शर्तें तोड़ी जा चुकी हैं।
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1 . पहली शर्त लेबनान में युद्धविराम से जुड़ी थी, जिसका पालन नहीं हुआ। इस पर शहबाज़ शरीफ़ ने भी जोर देते हुए कहा था कि लेबनान सहित हर क्षेत्र में तुरंत युद्धविराम होना चाहिए।
२. दूसरी घटना में ईरान की हवाई सीमा का उल्लंघन हुआ, जब एक घुसपैठिया ड्रोन फार्स प्रांत के लार शहर में घुस आया, जिसे बाद में मार गिराया गया।
३. तीसरी शर्त ईरान के परमाणु संवर्धन के अधिकार से जुड़ी थी, जिसे अमेरिका ने नकार दिया, जबकि यह प्रस्ताव का अहम हिस्सा था।
गालिबाफ ने साफ कहा कि जब बातचीत का आधार ही टूट चुका है, तो ऐसे माहौल में किसी भी तरह की वार्ता या युद्धविराम की उम्मीद करना तर्कसंगत नहीं है।
इस बीच, पाकिस्तान ने मध्यस्थता की कोशिश करते हुए 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में दोनों पक्षों को बातचीत के लिए आमंत्रित किया है, लेकिन मौजूदा हालात इस पहल को मुश्किल बना सकते हैं।



