भोपाल डिक्लेरेशन-2 की ड्राफ्ट बैठक के बाद बोले पूर्व सीएम दिग्जिवय सिंह-दलित-आदिवासी मुख्यमंत्री बने तो मुझे खुशी होगी

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भोपाल। भोपाल डिक्लेरेशन के 25 वर्ष पूरे होने से पहले सोमवार को राजधानी भोपाल में भोपाल डिक्लेरेशन-2 का ड्राफ्टिंग सत्र आयोजित किया गया। इस विशेष सत्र में पूर्व मुख्यमंत्री राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह, वरिष्ठ नेता फूल सिंह बरैया, डॉ. विक्रांत भूरिया, सज्जन सिंह वर्मा, ओमकार सिंह मरकाम समेत देशभर से आए बुद्धिजीवी और विषय विशेषज्ञ शामिल हुए।

बैठक के बाद जब दिग्विजय सिंह से पूछा गया कि अगर उनकी सरकार बनती है तो क्या दलित या आदिवासी मुख्यमंत्री बनेगा, तो उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने पहले भी आदिवासी समाज के राजा नरेशचंद्र सिंह और अजीत जोगी को मुख्यमंत्री बनाया है। अगर अनुसूचित जाति या जनजाति का मुख्यमंत्री बनता है तो मुझे खुशी होगी। उन्होंने कहा कि नेतृत्व में सामाजिक प्रतिनिधित्व लोकतंत्र को मजबूत करता है।

संविधान और लोकतंत्र पर खतरा

दिग्विजय सिंह ने कहा कि देश में संविधान और लोकतंत्र पर खतरा मंडरा रहा है। बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी का सबसे ज्यादा असर एससी-एसटी वर्ग पर पड़ रहा है, ऐसे में एक नए भोपाल डिक्लेरेशन की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2002 में जो भोपाल डिक्लेरेशन-1 हुआ था। उसे दलित एजेंडा नाम दिया गया था, लेकिन उसमें एससी-एसटी दोनों वर्गों के मुद्दे शामिल थे। इसका मूल उद्देश्य यह था कि अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के जो युवा रोजगार के योग्य हो चुके हैं, उन्हें नौकरियां मिलें। शासकीय खरीद में आरक्षण दिया जाए और एससी-एसटी वर्ग को पट्टे प्रदान किए जाएं।

भाजपा नेताओं को भी बुलाया था, नहीं आए

दिग्विजय सिंह ने कहा कि अब समय गया है कि भोपाल डिक्लेरेशन-2 का ड्राफ्ट तैयार किया जाए। मध्य प्रदेश चैप्टर का ड्राफ्ट लगभग तैयार हो चुका है। प्रथम सत्र में तय एजेंडे पर पांच सौ से अधिक लोगों के साथ अगले सत्र में चर्चा होगीदिग्विजय सिंह ने स्पष्ट किया कि यह किसी पार्टी विशेष का कार्यक्रम नहीं है। आयोजकों ने भाजपा के दलित और आदिवासी वर्ग के नेताओं को भी आमंत्रित किया था, लेकिन वे शामिल नहीं हुए।

भूरिया ने कहा-एससी-एसटी के अधिकार अधूरे

ट्राइबल कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया ने कहा कि भोपाल डिक्लेरेशन-2 की आवश्यकता इसलिए पड़ी है, क्योंकि SC-ST वर्ग के अधिकार अब भी अधूरे हैं और उनके साथ अन्याय जारी है। भाजपा शासन में अत्याचार बढ़े हैं, जिसके चलते सभी को एक मंच पर आकर इस संघर्ष को नई धार देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि यह कोई राजनीतिक लड़ाई नहीं, बल्कि अधिकारों की लड़ाई है।

सज्जन वर्मा ने कहा-अफसरों ने फेल किया

पूर्व मंत्री सज्जन वर्मा ने कहा कि 2002 में जब भोपाल डिक्लेरेशन (दलित एजेंडा) लागू हुआ, तब वे दिग्विजय सिंह की कैबिनेट में मंत्री थे। उन्होंने कहादलित एजेंडा पवित्र मन से लाया गया था, लेकिन वह अधकचरा रह गया। अधिकारियों, खासकर तहसीलदारों और पटवारियों ने उसे फेल करने में बड़ी भूमिका निभाई।

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