इंदौर। वैसे तो प्रदेश के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय जनता और मीडिया में चर्चा में बने रहने के लिए कोई अवसर नहीं छोड़ते, लेकिन वे इस बार 26 जनवरी के अवसर पर भी 10 दिन के अवकाश पर चले गए हैं। इसको लेकर चर्चाओ का बाजार गर्म है और सबसे ज्यादा चर्चा भागीरथपुरा मामले की हो रही है। लोग कह रहे हैं कि मंत्रीजी को अपनी बेइज्जती बर्दाश्त नहीं हो रही थी, इसलिए वे कुछ दिनों तक एकांतवास में ही रहना चाहते हैं।
नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के पास धार और सतना जिलों का प्रभार है। इसके बावजूद सामान्य प्रशासन विभाग ने मंगलवार शाम को मंत्रियों की ध्वजारोहण सूची जारी की, जिसमें कैलाश विजयवर्गीय का नाम नहीं था। इस साल उनके प्रभार वाले धार और सतना जिलों में कलेक्टर ही तिरंगा फहराएंगे। इसके बाद मंत्रीजी ने खुद ही इस बात की पुष्टि की है कि वे 10 दिनों के अवकाश पर रहेंगे। विजयवर्गीय के कार्यालय से उनके निजी सचिव ने एक पत्र जारी किया है, जिसमें परिवार के एक सदस्य के निधन का जिक्र किया गया है। इसी शोक के कारण वे अगले कुछ दिनों तक किसी भी सरकारी, सार्वजनिक या सामाजिक कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लेंगे।
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भागीरथपुरा मामले में लगातार हैं निशाने पर
हालांकि मंत्री विजयवर्गीय का विवादों से पुराना नाता रहा है, लेकिन ऐसा कम हुआ है कि वे मीडिया या जनता से दूर रहे हों। भागीरथपुरा में गंदे पानी से हुई मौतों के बाद मंत्री विजयवर्गीय पहली बार खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं। जनता उनकी सुन नहीं रही और वे जो बोल रहे हैं, उस पर पूरे देश में विवाद खड़ा हो रहा है। मंत्रीजी से जुड़े लोग ही बता रहे हैं कि यही वजह है कि वे अब सार्वजनिक कार्यक्रमों से कुछ दिनों तक किनारा करना चाहते हैं।
गंदे पानी से हुई मौतों ने बजाया घंटा
भागीरथपुरा मामले में मंत्री विजयवर्गीय पूरी तरह फेल नजर आए। पूरे देश में उनकी तब किरकिरी हो गई, जब गंदे पानी से मौत जैसे संवेदनशील मामले में एक नेशनल चैनल के पत्रकार के सवाल के जवाब में उन्होंने कहा था-घंटा सवाल। यह वीडियो पूरे देश में वायरल हुआ और लोग यह सवाल उठा रहे थे कि प्रदेश के एक वरिष्ठ मंत्री को आखिर हो क्या गया है। चूंकि मामला उनकी विधानसभा क्षेत्र का ही था, तो लोग और नाराज हो गए।
अपने ही बयान पर बुरी तरह घिरे मंत्रीजी
इसके बाद मंत्रीजी ने सीएम के एक कार्यक्रम में कांग्रेस को बुरी तरह कोसा। इसका वीडियो स्वयं मंत्रीजी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर डाला। इसके बाद लोगों ने जो इस पर रिएक्शन दिया, उसे देख मंत्रीजी बौखला गए। अपने राजनीतिक जीवन में शायद ही उनको लोगों ने कभी इतना कोसा हो। लोग इस घटना के लिए न केवल उन्हें जिम्मेदार मान रहे थे, बल्कि बयान और व्यवहार पर सवाल भी उठा रहे थे। लोगों के कमेंट्स ऐसे थे, जिन्हें सार्वजनिक तौर पर प्रकाशित भी नहीं किया जा सकता।
धार भोजशाला के मामले से भी काटी कन्नी
मंत्रीजी चूंकि धार के प्रभारी हैं और बसंत पंचमी पर भोजशाला का मुद्दा हर साल गरमाता है। इस बार बसंत पंचमी शुक्रवार को आ रही है और इसी दिन नमाज और पूजा होनी है। अवकाश के बहाने मंत्रीजी ने इस मुद्दे से भी कन्नी काट ली है। लोग तो यह भी कह रहे हैं कि मंत्रीजी ने अवकाश के बहाने सरकार को भी धार भोजशाला मामले में चुनौती दी है। लो अब मैं नहीं हूं-संभालो, जैसे संभालना हो।


