नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के जीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ का 8 नवंबर को आखिरी कार्यदिवस था। वे रविवार 10 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं। उन्होंने शुक्रवार को अपने विदाई भाषण में कहा कि मैं शायद सबसे ज्यादा ट्रोल होने वाला जज हूं। अब मुझे ट्रोल करने वाले सोमवार से क्या करेंगे, वे तो बेरोजगार हो जाएंगे।
चीफ जस्टिस ने अपने विदाई भाषण में बशीर बद्र का एक शेर भी पढ़ा-मुख़ालिफ़त से मिरी शख़्सियत संवरती है। मैं दुश्मनों का बड़ा एहतिराम करता हूं। उन्होंने अपने पिता का जिक्र करते हुए कहा कि मेरे पिता ने पुणे में यह छोटा सा फ्लैट खरीदा था। मैंने उनसे पूछा कि आखिर आप पुणे में फ्लैट क्यों खरीद रहे हैं? हम वहां कब जाकर रहेंगे? उन्होंने कहा, मुझे पता है कि मैं वहां कभी नहीं रहूंगा। उन्होंने कहा कि मुझे नहीं पता कि मैं आपके साथ कब तक रहूंगा लेकिन एक काम करो, जज के तौर पर अपने कार्यकाल के आखिरी दिन तक इस फ्लैट को अपने पास रखो। मैंने कहा, ऐसा क्यों? उन्होंने कहा, अगर आपको लगता है कि आपकी नैतिक ईमानदारी या बौद्धिक ईमानदारी से कभी समझौता हुआ है तो मैं आपको बताना चाहता हूं कि आपके सिर पर छत है। कभी भी खुद को वकील या जज के तौर पर समझौता करने की अनुमति न दें, क्योंकि आपके पास अपना कोई ठिकाना नहीं है।
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अनजाने में हुई गलतियों के लिए मांगी क्षमा
जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि आपने मुझसे पूछा कि मुझे क्या आगे बढ़ाता है। यह न्यायालय ही है, जिसने मुझे आगे बढ़ाया है, क्योंकि ऐसा एक भी दिन नहीं है, जब आपको लगे कि आपने कुछ नहीं सीखा है और आपको समाज की सेवा करने का अवसर नहीं मिला है। जरूरतमंद लोगों और उन लोगों की सेवा करने में सक्षम होने से बड़ी कोई भावना नहीं है, जिनसे आप कभी नहीं मिलेंगे, जिन्हें आप संभवतः जानते भी नहीं हैं, जिनके जीवन को आप बिना देखे प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने किसी भी अनजाने में हुई गलतियों या गलतफहमी के लिए माफी मांगते हुए कहा कि अगर मैंने कभी किसी को ठेस पहुंचाई है, तो मैं आपसे क्षमा चाहता हूं।



