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DRDO ने किया नाग मिसाइल Mk 2 का सफल परीक्षण, भारतीय सेना को मिलेगी और ताकत
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने स्वदेशी नाग मिसाइल Mk 2 का पोखरण फील्ड रेंज में सफल परीक्षण किया। यह तीसरी पीढ़ी की ‘फायर-एंड-फॉरगेट’ तकनीक पर आधारित एंटी-टैंक मिसाइल है, जो लक्ष्य पर निशाना साधने के बाद उसे स्वतः ही तबाह कर देती है।रक्षा मंत्रालय के अनुसार, तीनों परीक्षणों में मिसाइल प्रणालियों ने अधिकतम और न्यूनतम सीमा के लक्ष्यों को सटीकता से नष्ट किया। इस दौरान नाग मिसाइल के वाहक संस्करण-2 का भी परीक्षण किया गया। परीक्षणों की सफलता ने इसकी युद्ध क्षमता को पूरी तरह प्रमाणित कर दिया है, और अब यह भारतीय सेना में शामिल होने के लिए तैयार है।

डीआरडीओ ने इस मिसाइल को 300 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया है। इसका पहला सफल परीक्षण 1990 में हुआ था। इसके बाद, 2017, 2018, 2019 और 2019 में पोखरण रेंज में कई उन्नत तकनीकों के साथ परीक्षण किए गए।नाग मिसाइल डीआरडीओ के एकीकृत निर्देशित मिसाइल विकास कार्यक्रम का हिस्सा है। यह दुश्मन के टैंकों के खिलाफ भारतीय सेना को निर्णायक बढ़त दिलाएगी और उसकी क्षमताओं को कई गुना बढ़ा देगी।
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