नई दिल्ली। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह लोकसभा में बुधवार को आयुष्मान भारत योजना पर बात कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि दिल्ली में कमल खिल गया है और अब आयुष्मान भारत दिल्ली में भी है। अब सिर्फ पश्चिम बंगाल बचा है, चुनाव के बाद वहां भी कमल खिलेगा और आयुष्मान भारत योजना पश्चिम बंगाल में भी आएगी।
लोकसभा में त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय विधेयक 2025 पर चर्चा चल रही है। इसी दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सवालों के जवाब दिए। उन्होंने कहा कि इस सदन में त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय विधेयक 2025 पर लगभग 3 घंटे से चर्चा चल रही है। हर गांव में कोई न कोई इकाई ऐसी है जो सहकारिता के माध्यम से कृषि विकास, ग्रामीण विकास और स्वरोजगारी के काम में जुटी हुई है और देश की प्रगति में योगदान दे रही है। उन्होंने बताया कि इस विधेयक के पारित होने के बाद इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, स्वरोजगार और लघु उद्यमिता का विकास होगा, सामाजिक समावेश भी बढ़ेगा। इस सहकारी विश्वविद्यालय का विचार आने के बाद जब इसके नामकरण का प्रश्न आया तो इसका नाम त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय रखने का निर्णय लिया गया।
क्या है त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय विधेयक
त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय विधेयक 2025 एक प्रस्ताविक विधेयक है, जिसे तीन फरवरी 2025 को लोकसभा में पेश किया गया था। इस विधेयक का उद्देश्य भारत में एक सहकारी विश्वविद्यालय की स्थापना करना है। साथ ही इस विश्वविद्यालय का लक्ष्य सहकारिता के सिद्धांतो पर आधारित शिक्षा, शोध और नवाचार को बढ़ावा देना है। पारित विधेयक के अनुसार यह विश्वविद्यालय ग्रामीण विकास, कृषि, स्वरोजगार, लघु उद्यमिता और समाजिक समावेश के क्षेत्र में शिखा और प्रशिक्षण प्रदान करेगा।


