अमेरिका-ईरान तनाव चरम पर: वीकेंड तक हमले की तैयारी का दावा, अंतिम फैसला बाकी
अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर तनाव गहराता नजर आ रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि अमेरिकी सेना इस वीकेंड तक ईरान पर हमले के लिए पूरी तरह तैयार है। हालांकि व्हाइट हाउस और पेंटागन की ओर से अब तक इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
👉 यह भी पढ़ें:
- Jantar Mantar Protest पर सियासी संग्राम! मनीष सिसोदिया का कांग्रेस पर बड़ा हमला, बोले- ‘युवाओं की आवाज से क्यों घबरा गई कांग्रेस?’
- IPL 2026 Final: हार के बाद शुभमन गिल ने तोड़ी चुप्पी! RCB के लिए कही ऐसी बात जिसने जीत लिया फैंस का दिल
- IPL 2026 Final के बाद बड़ा खतरा! Gujarat Titans Team Bus में लगी आग, खिलाड़ियों की जान पर बन आई?
- Abhishek Banerjee Attack Row: ‘जो हुआ, गलत हुआ लेकिन जिम्मेदार कौन?’ मंत्री अग्निमित्रा पॉल के बयान से बंगाल की राजनीति में नया बवाल
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी सैन्य बलों को संभावित कार्रवाई के लिए अलर्ट पर रखा गया है। बताया जा रहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अभी तक ईरान के खामेनई प्रशासन के खिलाफ हमले को लेकर अंतिम निर्णय नहीं लिया है।
सैन्य तैयारी पूरी, निर्णय पर मंथन जारी
रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी सेना ने जंगी जहाज, फाइटर जेट और रिफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट तैनात कर दिए हैं। व्हाइट हाउस को सूचित किया गया है कि सेना वीकेंड तक कार्रवाई के लिए तैयार है, लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप अब भी इस कदम के पक्ष और विपक्ष पर विचार कर रहे हैं।
सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि ट्रंप ने सैन्य कार्रवाई के संभावित परिणामों पर सलाहकारों और करीबी सहयोगियों से चर्चा की है।
न्यूक्लियर डील पर बढ़ा टकराव
ट्रंप ने तेहरान को चेतावनी दी है कि यदि मौजूदा बातचीत में 2018 में तोड़ी गई न्यूक्लियर डील के स्थान पर नई सहमति नहीं बनती, तो अमेरिका सैन्य विकल्प पर विचार कर सकता है।
जानकारी के मुताबिक, इस समय मिडिल ईस्ट में अमेरिका के 13 युद्धपोत तैनात हैं। दुनिया का सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड अटलांटिक महासागर से कैरिबियन होते हुए मिडिल ईस्ट की ओर बढ़ रहा है। इसके साथ तीन डिस्ट्रॉयर भी तैनात किए गए हैं।
बढ़ती आशंकाएं, वैश्विक नजरें टिकीं
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। फिलहाल सभी की नजरें व्हाइट हाउस के अंतिम फैसले पर टिकी हैं, जो क्षेत्रीय और वैश्विक राजनीति पर गहरा असर डाल सकता है।


