पुणे ब्रिज हादसे पर सियासत गरम, उद्धव ठाकरे ने इसे सरकार की आपराधिक लापरवाही बताया, कांग्रेस ने भी उठाए सवाल

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मुंबई। महाराष्ट्र के पुणे में रविवार को इंद्रायणी नदी पर बना 30 साल पुराना लोहे का पुल ढह गया। इस हादसे में अब तक 4 लोगों की मौत और 51 लोगों के घायल होने की बात कही जा रही है। इस मामले में शिवसेना यूबीटी नेता उद्धव ठाकरे ने सरकार पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने इसे सरकार की आपराधिक लापरवाही बताया, वहीं कांग्रेस ने जवाबदेही तय करने की मांग की है।

उद्धव ठाकरे ने इस घटना पर शोक जताते हुए इसे सरकार की आपराधिक लापरवाही करार दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार विकास की बातें तो करती हैं, लेकिन एक मजबूत पुल तक नहीं बना सकी। उस पुराने जर्जर पुल से 44 पर्यटक बह गए, यह अत्यंत दुखद और निंदनीय है। ठाकरे ने सवाल उठाया कि आखिर सरकार इस तरह की घटनाओं की जिम्मेदारी कब लेगी? उद्धव ठाकरे ने मालवण स्थित राजकोट किले में छत्रपती शिवाजी महाराज की प्रतिमा के चबूतरे की जमीन धंसने की घटना को भी उठाया। उन्होंने कहा कि पहले प्रधानमंत्री द्वारा स्थापित की गई प्रतिमा गिर चुकी है और अब नई प्रतिमा के चबूतरे की जमीन ही धंस गई है। यह दर्शाता है कि शिवरायों की स्मृति के साथ भी घोर लापरवाही हो रही है। सरकार अब किस मुंह से सफाई देगी? उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह सम्मान नहीं, अपमान है, और इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए।

खड़गे बोले-आखिर ऐसा हुआ क्यों?

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि हादसा बहुत दुखद है और इससे बचा जा सकता था। इस दुखद घटना के बावजूद हमें यह जरूर पूछना चाहिए कि आखिर ऐसा क्यों हुआ। उन्होंने कहा कि जो लोग सत्ता में बैठे हैं, उनसे जवाब मांगना जरूरी है। जो लोग इस हादसे के लिए जिम्मेदार हैं, उन पर कानून के मुताबिक सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। कांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने कहा कि अब समय है कि दोषियों को सजा दी जाए और ऐसा दोबारा हो, इसके लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

चार लोगों की मौत की पुष्टि

इस हादसे में अब तक 4 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है और 51 घायल बताए जा रहे हैं। घटना में जान गंवाने वालों में चंद्रकांत साठले, रोहित माने, विहान माने और एक अज्ञात पुरुष जिसकी पहचान नहीं हुई, शामिल हैं। घायलों को पास के चार निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। पुल का एक हिस्सा नदी से बाहर निकाला जा चुका है, लेकिन अब भी कई बाइकें पुल पर अटकी हुई हैं।

गांववाले पहले ही कर चुके थे सावधान

बताया जाता है कि यह पुल 35 साल पहले यानी 1990 में बना था और उसके बाद से कभी भी इसका स्ट्रक्चरल ऑडिट नहीं हुआ। गांववालों ने पुलिस को इस बात की सूचना दी थी कि पुल पर क्षमता से अधिक लोग मौजूद हैं। ये भी बताया जा रहा है कि पांच साल पहले पीडब्ल्यूडी से मांग की गई थी कि इस पुल को बंद कर दिया जाए। गावंवालों ने सार्वजनिक निर्माण विभाग और ग्राम पंचायत को दो साल पहले ही पत्र लिखकर पुल की मरम्मत करने और पर्यटकों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई थी, लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं मिला।

Ardhendu Bhushan
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Ardhendhu Bhushan is a senior consulting editor with extensive experience in the media industry. He is recognized for his sharp editorial insight and strategic guidance.

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